महाराष्ट्र के बारामती में चार्टर विमान की क्रैश लैंडिंग की घटना ने विमानन सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब विमान अपने गंतव्य पर उतरने की प्रक्रिया में था। लैंडिंग के अंतिम चरण में विमान अचानक असंतुलित हो गया, जिसके बाद आपात स्थिति पैदा हुई और विमान सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतर नहीं सका।
लैंडिंग क्यों होती है सबसे संवेदनशील चरण
विमानन विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी उड़ान का सबसे जोखिम भरा हिस्सा टेक-ऑफ और लैंडिंग माना जाता है। खासकर लैंडिंग के दौरान विमान की ऊंचाई तेजी से कम होती है, गति घटाई जाती है और पायलट को कुछ ही सेकेंड में कई तकनीकी फैसले लेने पड़ते हैं। इस दौरान छोटी सी चूक या बाहरी हस्तक्षेप भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
मौसम की मार कैसे बिगाड़ देती है हालात
लैंडिंग के वक्त मौसम सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। तेज हवा, अचानक बदलती विंड डायरेक्शन, घने बादल और कम दृश्यता पायलट की जजमेंट को प्रभावित करती है। बारिश या नमी के कारण रनवे फिसलन भरा हो सकता है, जिससे विमान के पहिए ज़मीन पर सही पकड़ नहीं बना पाते। ऐसे हालात में कई बार हार्ड या क्रैश लैंडिंग की स्थिति बन जाती है।
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तकनीकी खराबी से कैसे बढ़ता है खतरा
लैंडिंग के समय विमान के कई अहम सिस्टम एक साथ काम करते हैं। लैंडिंग गियर, फ्लैप्स, ब्रेक सिस्टम और हाइड्रोलिक यूनिट में से किसी एक में भी खराबी आ जाए, तो विमान का संतुलन बिगड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम क्षणों में इंजन पावर में थोड़ी सी कमी या कंट्रोल सिस्टम की प्रतिक्रिया में देरी भी हादसे को जन्म दे सकती है।
रनवे और एयरपोर्ट की भूमिका
कई बार हादसे की वजह विमान नहीं, बल्कि एयरपोर्ट की परिस्थितियां होती हैं। छोटे या क्षेत्रीय एयरपोर्ट्स पर रनवे की लंबाई सीमित होती है और आधुनिक नेविगेशन सिस्टम हर जगह उपलब्ध नहीं होते। अगर रनवे गीला हो या आसपास खुला इलाका हो, तो तेज हवा विमान को रनवे की दिशा से भटका सकती है, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है।
पायलट पर अचानक बढ़ा दबाव
लैंडिंग के आखिरी कुछ सेकेंड पायलट के लिए सबसे निर्णायक होते हैं। एक ओर मौसम की चुनौती होती है, दूसरी ओर तकनीकी अलर्ट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देश। इन सबके बीच पायलट को तुरंत फैसला लेना पड़ता है कि लैंडिंग जारी रखी जाए या विमान को दोबारा ऊपर ले जाया जाए। कई बार हालात इतनी तेजी से बदलते हैं कि फैसले का समय बेहद सीमित रह जाता है।
बर्ड हिट और बाहरी कारण भी बनते हैं वजह
कुछ मामलों में लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकराव यानी बर्ड हिट या रनवे के आसपास मौजूद किसी बाहरी अवरोध से भी विमान के इंजन या नियंत्रण प्रणाली पर असर पड़ता है। हालांकि ऐसे कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होती है।
जांच के बाद ही सामने आएगी असली वजह
हर विमान दुर्घटना के बाद डीजीसीए और विमानन विशेषज्ञ विस्तृत जांच करते हैं। फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग, मौसम की रिपोर्ट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुई बातचीत का विश्लेषण किया जाता है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर यह तय किया जाता है कि हादसा तकनीकी खराबी, मौसम या मानवीय चूक की वजह से हुआ।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अधिकतर विमान हादसे किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई कारणों के एक साथ सामने आने से होते हैं। यही वजह है कि शुरुआती सूचनाओं के आधार पर किसी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं माना जाता। बारामती की इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि लैंडिंग के दौरान विमानन सुरक्षा कितनी संवेदनशील होती है और हर ऐसे हादसे की गहन जांच क्यों जरूरी होती है।












