रांची: झारखंड में नक्सलियों के बुरे दिन शुरू हो चुके हैं। ऐसा इस लिए क्योंकि पिछले छह महीनों में राज्यभर में चले सुरक्षा बलों के अभियान ने नक्सल नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। मुठभेड़ों की तेज़ रफ्तार, बड़े इनामी नक्सलियों की मौत और सैकड़ों गिरफ्तारियों ने साफ कर दिया है कि अब जंगलों में नक्सली राज का अंत करीब है। ऐसा इस लिए क्यों कि पुलिस और सुरक्षाबलों की जमीनी कार्रवाई का असर साफ तौर पर अब दिख रहा है। पिछले छह महीनों की बात करे तो अब तक कुल 20 खूंखार नक्सलियों को एनकाउंटर में मार गिराया गया, जबकि 197 नक्सलियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया है। ये आंकड़े साफ तौर पर दिखाते है कि झारखंड की तस्वीर अब बदल रही है।
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एनकाउंटर दर एनकाउंटर, गिरते गए नक्सली
21 जनवरी 2025, बोकारो: पुलिस ने एरिया कमांडर शांति देवी और नक्सली मनोज टुडू को ढेर किया।
29 जनवरी, चाईबासा: एनकाउंटर में जोनल कमांडर संजय गंझू और नक्सली एनाल्डा की महिला सहयोगी हेमंत मांगियां मारी गईं।
रामगढ़ में, जनवरी में ही नक्सली राहुल तुरी मारा गया।
21 अप्रैल 2025, राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा एनकाउंटर हुआ। एक ही दिन में 8 नक्सलियों को ढेर किया गया, जिनमें शामिल था 1 करोड़ का इनामी विवेक उर्फ प्रयाग मांझी।
जुलाई में, बोकारो में 5 लाख के इनामी कुंवर का एनकाउंटर किया गया।
इसके साथ ही, गुमला जिले में जेजेपीएम के सब-जोनल कमांडर दिलीप लोहरा को भी आज मुठभेड़ में मार गिराया गया है।
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अब ऑपरेशन सारंडा
अब सुरक्षाबलों का अगला टारगेट है पश्चिमी सिंहभूम के घने जंगलों में बसा सारंडा। यहां डेरा डाले बैठा है 1 करोड़ के इनामी मिसीर बेसरा, असीम मंडल, अनल दा औऱ अनुज जो पोलित ब्योरों के सदस्य है। और लंबे समय से सारंडा के जगलों में छिपे हुए है। इसे देखते हुए झारखंड पुलिस ने अपनी विशेष टीम को सारंडा में तैनात कर दिया है और ऑपरेशन को लेकर रणनीति दिन प्रतिदिन सख्त होती जा रही है।
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डीजीपी का दावा: मानसून खत्म होने से पहले नक्सलवाद का खात्मा
झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि मानसून खत्म होने से पहले झारखंड को नक्सल मुक्त बना दिया जाएगा। मानसून के दौरान आमतौर पर ऑपरेशन धीमे हो जाते हैं, लेकिन इस बार ऐसा होता नहीं दिख रहा है। फोर्स की सक्रियता और लगातार होती कार्रवाई बता रही है कि यह अभियान थमने वाला नहीं है।
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नक्सल राज की कहानी अब अंतिम मोड़ पर
झारखंड में एक दौर था जब नक्सल नाम से लोग कांपते थे। लेकिन आज हालात बदल रहे हैं। गांवों में अब विकास की बातें हो रही हैं, सड़कें बन रही हैं और लोग सुरक्षा बलों पर भरोसा करने लगे हैं। नतीजा साफ है, नक्सली कमजोर हो चुके हैं, और राज्य तेज़ी से नक्सल मुक्त झारखंड की ओर बढ़ रहा है।

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