National News: ग्रामीण रोजगार और आजीविका को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB- G RAM G Bill, 2025 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह बिल अब कानून बन गया है। यह कानून संसद के दोनों सदनों से पहले ही पास हो चुका था और इसे 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की तैयारी है।
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इस नए कानून के तहत अब ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन का मजदूरी रोजगार मिलेगा, जबकि अभी तक मनरेगा के तहत 100 दिन का ही प्रावधान था। यह कानून करीब 20 साल पुराने मनरेगा की जगह लेगा। सरकार का कहना है कि समय के साथ गांवों की जरूरतें बदली हैं, इसलिए पुराने कानून की जगह एक नया और आधुनिक ढांचा लाया गया है। इसका मकसद ग्रामीण परिवारों की आय को सुरक्षित करना और गांवों में स्थायी व उपयोगी काम कराना है।
G RAM G Bill क्या है और इससे क्या बदलेगा?
G RAM G बिल को विकसित भारत 2047 के विजन से जोड़ा गया है। इसमें सिर्फ अस्थायी काम नहीं बल्कि सड़क, पानी, भंडारण, बाजार और जलवायु से जुड़े टिकाऊ कामों पर जोर दिया गया है। खेती के समय मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए ‘एग्री-पॉज’ का प्रावधान किया गया है, यानी बुवाई और कटाई के पीक सीजन में कुछ समय के लिए सरकारी काम रोका जाएगा। यह सुविधा मनरेगा में नहीं थी।
मुख्य फायदे और असर
इस कानून में मजदूरी का भुगतान हर हफ्ते या ज्यादा से ज्यादा 15 दिन के भीतर करना अनिवार्य होगा। काम की निगरानी के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी, जियो-टैगिंग और जीपीएस सिस्टम लागू किए जाएंगे ताकि गड़बड़ी रोकी जा सके। फंडिंग में भी बदलाव हुआ है, जहां खर्च का बंटवारा अब केंद्र और राज्य 60:40 के अनुपात में करेंगे। अगर समय पर काम नहीं मिला तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी रहेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस कानून से गांवों में रोजगार बढ़ेगा, पलायन कम होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी।













