धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता पांच वर्षीय अंश कुमार और उसकी चार वर्षीय बहन अंशिका कुमारी की गुमशुदगी को 11 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक दोनों मासूमों का कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग सका है। बच्चों की सुरक्षित बरामदगी के लिए रांची पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) लगातार प्रयास कर रही है। पुलिस, CID और अन्य एजेंसियों की टीमें देश के अलग-अलग राज्यों में बच्चों की तलाश में जुटी हैं, लेकिन अब तक जांच एक निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंच सकी है।
इस पूरे मामले में एक अहम तथ्य यह है कि खोजी कुत्ते (डॉग स्क्वॉड) एक विशेष स्थान से आगे बच्चों की गंध को ट्रेस नहीं कर पाए, जिसने जांच एजेंसियों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
देशभर में फैली तलाश, सात राज्यों में दबिश
रांची पुलिस की SIT की कई टीमें झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र में बच्चों की तलाश कर रही हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाल गृह, शेल्टर होम और संदिग्ध ठिकानों पर जांच की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बाल तस्करी के एंगल को भी गंभीरता से खंगाला जा रहा है।
खोजी कुत्ते एक जगह से आगे क्यों नहीं बढ़ पाए?
जांच में शामिल डॉग स्क्वॉड बच्चों की गंध को एक निश्चित स्थान तक ट्रेस करने के बाद आगे नहीं बढ़ सका। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं—
1. उसी स्थान से बच्चों को वाहन में बैठाया गया
खोजी कुत्ते ज़मीन पर मौजूद ग्राउंड सेंट (Ground Scent) के आधार पर काम करते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को:
- बाइक,
- ऑटो,
- कार या अन्य वाहन में बैठा दिया जाए,
तो उसकी गंध जमीन से टूट जाती है। ऐसे मामलों में डॉग स्क्वॉड का वहीं रुक जाना इस ओर इशारा करता है कि वह स्थान बच्चों का “लास्ट नोन पॉइंट” (Last Known Point) हो सकता है।
2. भीड़ और आवाजाही से गंध खत्म होना
धुर्वा इलाके का वह क्षेत्र बस्ती वाला इलाका है, जहां:
- लगातार लोगों की आवाजाही,
- मिट्टी, पानी या अन्य गंधों का मिश्रण
गंध को नष्ट कर सकता है। ऐसे में कुत्ते भ्रमित होकर ट्रेल छोड़ देते हैं।
3. शुरुआती गंध शुद्ध न होना
यदि बच्चों के कपड़े:
- कई लोगों ने छुए हों,
- धुले हुए हों,
- या घटना के काफी समय बाद कुत्तों को दिए गए हों,
तो खोजी कुत्ते को सही और शुद्ध गंध (Pure Scent) नहीं मिल पाती।
4. समय का अंतर
विशेषज्ञों के मुताबिक, खोजी कुत्ते 24 से 72 घंटे के भीतर गंध को बेहतर तरीके से पकड़ पाते हैं।
11 दिन पुराना मामला होने के कारण:
- धूप,
- बारिश,
- हवा
गंध को कमजोर कर देती है।
खोजी कुत्ते कैसे काम करते हैं?
खोजी कुत्ते कोई सामान्य कुत्ते नहीं होते। इन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
गंध पहचानने की अद्भुत क्षमता
कुत्तों की सूंघने की क्षमता इंसानों से करीब 50 गुना अधिक होती है। यही कारण है कि वे कपड़े, जूते या किसी वस्तु से जुड़ी गंध के आधार पर व्यक्ति को पहचान सकते हैं।
किन नस्लों का किया जाता है प्रयोग
खोज और बचाव कार्यों में आमतौर पर:
- जर्मन शेफर्ड
- लैब्राडोर
- गोल्डन रिट्रीवर
- ब्लडहाउंड
- बॉर्डर कॉली
जैसी नस्लों का उपयोग किया जाता है, जिनमें सीखने और स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की क्षमता अधिक होती है।
कैसे दिया जाता है प्रशिक्षण
कुत्तों को:
- विस्फोटक पदार्थों,
- मानव गंध,
- पानी और जमीन दोनों में खोज
का प्रशिक्षण दिया जाता है। सही पहचान करने पर उन्हें पुरस्कार दिया जाता है, जिससे उनकी सीखने की प्रक्रिया मजबूत होती है।
“बुद्धिमान अवज्ञा” (Intelligent Disobedience)
खोजी कुत्तों को इस तरह प्रशिक्षित किया जाता है कि यदि हैंडलर गलत दिशा में जा रहा हो, तो कुत्ता अपने संकेतों से यह बता सके कि गंध कहीं और है। इसे “बुद्धिमान अवज्ञा” कहा जाता है।
क्या संकेत दे रहा है डॉग स्क्वॉड का रुक जाना?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का संकेत अक्सर बताता है कि:
- बच्चे खुद भटके नहीं,
- उन्हें किसी ने उसी स्थान से हटाया,
- और आगे किसी माध्यम (संभवतः वाहन) का उपयोग किया गया।
इसी कारण पुलिस अब तकनीकी जांच, मोबाइल लोकेशन, सीडीआर और आसपास के CCTV फुटेज पर अधिक फोकस कर रही है।
आगे की चुनौती
11 दिन बाद भी बच्चों का पता न चलना पुलिस और परिजनों दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि पुलिस का दावा है कि हर संभावित एंगल पर जांच जारी है और जल्द ही इस मामले में कोई ठोस सुराग मिलने की उम्मीद है।
अंश और अंशिका की सुरक्षित वापसी को लेकर पूरा राज्य दुआ कर रहा है, वहीं यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि शहरी बस्तियों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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