Religion News: भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि और ज्ञान के देवता के रूप में पूजा जाता है। हर शुभ कार्य की शुरुआत गणपति की वंदना से होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी रोचक बातें हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं? इस लेख में हम आपको भगवान गणेश से जुड़ी कुछ कम प्रसिद्ध लेकिन बेहद दिलचस्प जानकारियाँ देंगे।
1. गणेश जी के दो नहीं, चार अवतार हैं
अधिकतर लोग केवल एक ही रूप में गणेश जी की कल्पना करते हैं, लेकिन पुराणों में उनके चार अवतार का वर्णन मिलता है—वक्रतुंड, एकदंत, महोदर, और गजानन। हर अवतार का एक खास उद्देश्य और विशेषता है, जैसे कि वक्रतुंड ने “मत्सरासुर” का संहार किया था।
2. परशुराम से युद्ध में टूटा था एक दांत
गणेश जी को एकदंत क्यों कहा जाता है, इसके पीछे एक कहानी है। एक बार परशुराम भगवान शिव से मिलने कैलाश पर्वत पहुँचे, लेकिन गणेश जी ने उन्हें रोक दिया। इससे क्रोधित होकर परशुराम ने अपने फरसे से गणेश जी पर प्रहार किया, जिससे उनका एक दांत टूट गया। तभी से वे “एकदंत” कहलाए।
3. श्री गणेश को पहले लेखक भी कहा जाता है
महाभारत की रचना के समय, ऋषि वेदव्यास ने गणेश जी को इसे लिखने के लिए कहा। गणेश जी ने शर्त रखी कि वे बिना रुके लिखेंगे, अगर वेदव्यास रुक गए, तो वे लेखन बंद कर देंगे। वेदव्यास ने भी शर्त रखी कि गणेश जी हर श्लोक को पहले समझेंगे, फिर लिखेंगे। इस तरह पूरी महाभारत का लेखन संपन्न हुआ।
4. मूषक (चूहा) कैसे बना उनका वाहन?
गणेश जी का वाहन मूषक है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह पहले एक दानव था जिसका नाम “गजमुख” था। उसने घोर तपस्या के बाद वरदान प्राप्त कर लिया था और अराजकता फैलाने लगा। भगवान गणेश ने उसे पराजित किया और उसे छोटा कर अपने वाहन के रूप में स्वीकार किया।
5. दुनिया में एक मंदिर है जहाँ गणेश जी दाएं सूंड वाले रूप में पूजे जाते हैं
अधिकतर मूर्तियों में गणेश जी की सूंड बाईं ओर होती है, जिसे सौम्य माना जाता है। लेकिन महाराष्ट्र के पुणे में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर में उनकी सूंड दाईं ओर है। दाएं सूंड वाले गणपति को पूजा में विशेष विधि और नियमों के साथ पूजना होता है, वरना उल्टा असर हो सकता है।
6. गणेश जी के पास दो पत्नियाँ भी हैं
कुछ ग्रंथों में उल्लेख है कि गणेश जी की दो पत्नियाँ थीं – रिद्धि (संपन्नता) और सिद्धि (सफलता)। इनसे उन्हें दो पुत्र प्राप्त हुए – लाभ और क्षेम। इसलिए उनके नाम के साथ अक्सर ‘रिद्धि-सिद्धि दाता’ और ‘लाभ-क्षेम प्रदाता’ भी कहा जाता है।
7. गणेश जी की पूजा विदेशों में भी होती है
भारत के अलावा श्रीलंका, नेपाल, थाईलैंड, इंडोनेशिया, बाली, जापान और कंबोडिया जैसे कई देशों में भी गणेश जी की पूजा होती है। खासकर इंडोनेशिया में, जो एक मुस्लिम-बहुल देश है, वहाँ भी गणेश जी की मूर्तियाँ पाई जाती हैं और उन्हें ‘देवता’ के रूप में सम्मान मिलता है।
8. केवल गणेश जी की मूर्ति को खाने का भोग “मोदक” चढ़ता है
गणेश जी को मोदक बेहद प्रिय हैं। मान्यता है कि मोदक में ज्ञान और आनंद का समावेश होता है। इसलिए उनकी पूजा में मोदक का भोग अत्यंत शुभ माना जाता है। महाराष्ट्र में विशेष रूप से गणेश चतुर्थी पर ‘उकडीचे मोदक’ बनाए जाते हैं।
9. गणेश जी की मूर्ति बनाने की भी है खास परंपरा
गणेश जी की मूर्ति आमतौर पर मिट्टी से बनाई जाती है, ताकि विसर्जन के बाद वह प्रकृति में मिल जाए। यह परंपरा पर्यावरण संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण है। आजकल कई जगह बीज वाले गणपति भी बनाए जा रहे हैं, जिन्हें विसर्जन के बाद पौधे के रूप में देखा जा सकता है।
10. श्री गणेश को प्रथम पूज्य क्यों माना जाता है?
देवताओं में सबसे पहले गणेश जी की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि वे सभी विघ्नों को दूर करने वाले माने जाते हैं। स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने सभी देवताओं से कहा था कि जो सबसे पहले पृथ्वी का चक्कर लगाकर लौटेगा, वही प्रथम पूज्य होगा। गणेश जी ने अपनी बुद्धिमानी से माता-पिता (शिव-पार्वती) की परिक्रमा की और प्रथम पूज्य बन गए।












