रांची: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने वर्ष 2026 की मैट्रिक एवं इंटर बोर्ड परीक्षाओं के लिए परीक्षा शुल्क में औसतन 25% तक की वृद्धि कर दी है। मंगलवार को जारी अधिसूचना के बाद राज्य के करीब 7.5 लाख छात्र-छात्राओं पर इसका सीधा प्रभाव पड़ने जा रहा है।
नई फीस 2026 सत्र से लागू होगी।
मैट्रिक छात्राओं की फीस 980 से बढ़कर 1680 रुपये
जैक द्वारा जारी संशोधित शुल्क संरचना के अनुसार:
- मैट्रिक (छात्राएँ): ₹980 → ₹1680
- मैट्रिक (सामान्य/EWS): ₹1180 → ₹1680
- इंटर (छात्राएँ): ₹1100 → ₹1900
- इंटर (छात्र): ₹1400 → ₹1900
स्वतंत्र परीक्षार्थियों (Private Candidates) की श्रेणी में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है।
OBC, SC और ST वर्गों के लिए एक समान फीस निर्धारित की गई है।
“बजट में वृद्धि के कारण आवश्यक” — शिक्षा विभाग
शिक्षा विभाग ने तर्क दिया कि विभागीय बजट में आवश्यक बढ़ोतरी और परीक्षा संचालन लागत बढ़ने के कारण फीस में संशोधन जरूरी था।
हालांकि अभिभावक वर्ग का कहना है कि यह कदम सीधे-सीधे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रभावित करेगा।
राजनीतिक विवाद तेज — BJP ने इसे गरीबों पर बोझ बताया
फीस बढ़ोतरी के फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
कन्हाई सिंह (भाजपा सांसद प्रतिनिधि) ने कहा — “निर्णय असंवेदनशील”
कन्हाई सिंह ने सरकार पर आरोप लगाया कि महंगाई के दौर में गरीब परिवार पहले से ही संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में परीक्षा शुल्क को इतनी अधिक बढ़ाना बच्चों की पढ़ाई पर सीधा प्रहार है।
उन्होंने कहा:
“कई छात्र बढ़ी हुई फीस न भर पाने के कारण फॉर्म ही नहीं भर पाएंगे। सरकार तुरंत निर्णय वापस ले।”
दीपक राज (भाजपा) ने कहा — “शिक्षा को कठिन बना रही सरकार”
दीपक राज ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं, ऐसे में शिक्षा को महंगा करना अनुचित और गैर-जनहितकारी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार फैसला वापस नहीं लेती तो इसका असर लाखों बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा।
पहली बार एक साथ इतनी बड़ी बढ़ोतरी
पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा शुल्क में इतना बड़ा बदलाव एक साथ नहीं किया गया था।
अभिभावक संगठनों ने भी इस संबंध में सरकार से पुनर्विचार की मांग की है।













