Ranchi: झारखंड के कोयलांचल में आपराधिक गिरोहों की सक्रियता एक बार फिर पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनती दिख रही है। रांची, रामगढ़, हजारीबाग, चतरा और धनबाद समेत कोयला कारोबार वाले इलाकों में रंगदारी, धमकी और फायरिंग की घटनाओं में अलग-अलग गिरोहों के नाम सामने आते रहे हैं। हाल के महीनों में राहुल दुबे और राहुल सिंह गिरोह से जुड़ी घटनाओं ने पुलिस की चिंता बढ़ाई है।
इन दोनों गिरोहों के अलावा प्रिंस खान, पांडेय और श्रीवास्तव गिरोह का नाम भी अलग-अलग इलाकों में आपराधिक गतिविधियों से जुड़ता रहा है। पुलिस की कार्रवाई में कई संदिग्धों की गिरफ्तारी और मुठभेड़ के मामले सामने आए हैं। हालांकि, कथित सरगनाओं और उनके पूरे नेटवर्क तक पहुंचना अब भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है।
झारखंड में कौन-कौन से गिरोह सक्रिय होने के दावे?
झारखंड के कोयलांचल में लंबे समय से कई आपराधिक गिरोहों के सक्रिय होने की रिपोर्टें सामने आती रही हैं। इनमें राहुल दुबे गिरोह, राहुल सिंह गिरोह, प्रिंस खान गिरोह, पांडेय गिरोह और श्रीवास्तव गिरोह के नाम प्रमुखता से सामने आते हैं।
राहुल दुबे को लेकर पुलिस और मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जाता रहा है कि उसने अमन साहू के नेटवर्क के बाद अपना अलग प्रभाव बनाया। उसके गिरोह पर कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से रंगदारी मांगने, धमकी देने और फायरिंग के आरोप लगते रहे हैं।
वहीं, राहुल सिंह भी कभी अमन साहू के साथ काम करने के बाद अलग नेटवर्क संचालित करने वाला आरोपी बताया जाता है। उसके गिरोह का नाम रांची, गुमला और लातेहार समेत अलग-अलग आपराधिक मामलों की जांच में सामने आया है।
धनबाद और आसपास के इलाकों में प्रिंस खान गिरोह का नाम रंगदारी और धमकी के मामलों में सामने आता रहा है। वहीं रामगढ़ और हजारीबाग के कोयलांचल में पांडेय और श्रीवास्तव गिरोह के सक्रिय होने की रिपोर्टें मिलती रही हैं।
राहुल दुबे गिरोह पर हाल के महीनों में कई वारदातों के आरोप
राहुल दुबे गिरोह का नाम पिछले कुछ महीनों में कई घटनाओं से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार—
- 29 अक्टूबर 2026: हजारीबाग के एके इंटरनेशनल होटल के बाहर फायरिंग की घटना सामने आई। इस मामले में राहुल दुबे गिरोह की भूमिका और कथित जिम्मेदारी लेने की बात सामने आई है।
- 26 अक्टूबर 2026: हजारीबाग के बड़का स्याल स्थित सैनिक इंफ्रा के गेट के पास रात करीब 12:30 बजे फायरिंग की घटना हुई। इसमें सुरक्षा गार्ड दिवेश कुमार ओझा के घायल होने की जानकारी सामने आई। मौके से कथित तौर पर एक पर्चा भी मिला, जिसमें सीसीएल अधिकारियों और प्रोजेक्ट ऑफिसर को चेतावनी दिए जाने की बात कही गई।
- 22 अगस्त 2026: हजारीबाग के गिद्दी इलाके में कोयला खनन और ट्रांसपोर्टिंग रूट पर फायरिंग की घटना सामने आई थी।
- 24 जुलाई 2026: केरेडारी स्थित चंद्रगुप्त कोल परियोजना के बुकरू इलाके में पुलिस और राहुल दुबे गिरोह से जुड़े अपराधियों के बीच मुठभेड़ की बात सामने आई थी।
- 6 जुलाई 2026: गिद्दी क्षेत्र में सीओ पोस्ट के पास रंगदारी से जुड़ी फायरिंग की घटना सामने आई थी।
- 22 अप्रैल 2026: बड़कागांव के 13 माइल इलाके में लेवी नहीं देने के आरोप में एक कोयला लदे हाइवा में आग लगाने की घटना सामने आई थी। इस मामले में भी राहुल दुबे गिरोह का नाम सामने आया था।
इन घटनाओं में गिरोह की भूमिका को लेकर पुलिस जांच और अलग-अलग रिपोर्टों में दावे किए गए हैं। प्रत्येक मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
राहुल सिंह गिरोह का भी बढ़ा नेटवर्क, पेट्रोल पंप से भारतमाला साइट तक कनेक्शन की जांच
राहुल सिंह गिरोह का नाम भी पिछले कुछ समय में रांची और आसपास के जिलों में हुई कई आपराधिक घटनाओं की जांच में सामने आया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह फायरिंग, रंगदारी और लूट जैसी वारदातों में शामिल आरोपियों के नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
राहुल सिंह गिरोह से जुड़ी प्रमुख घटनाएं
- 11 अक्टूबर 2026: रांची के कांके रिंग रोड स्थित एक पेट्रोल पंप के बाहर फायरिंग हुई। पुलिस के अनुसार, इस घटना की जिम्मेदारी राहुल सिंह गिरोह की ओर से लेने की बात सामने आई थी।
- अक्टूबर 2026: पुलिस जांच में इस मामले के तार गुमला में भारतमाला परियोजना की निर्माण साइट पर हुई फायरिंग से जुड़ते दिखाई दिए। इसके अलावा बेड़ो लूटकांड और लातेहार के पेट्रोल पंप पर गोलीबारी के मामलों में भी गिरोह के कनेक्शन की जांच की जा रही है।
- 27 अक्टूबर 2026: रांची के नयासराय रेलवे लाइन के पास पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई। इसमें लोहरदगा निवासी शूटर शाहिद के पैर में गोली लगी, जबकि उसके एक साथी को पुलिस ने पकड़ लिया।
- शाहिद से पूछताछ: पुलिस के अनुसार, पूछताछ में शाहिद ने राहुल सिंह के निर्देश पर कई वारदातों को अंजाम देने की बात बताई। पुलिस अब उसके बयान और अन्य मामलों के बीच कनेक्शन की जांच कर रही है।
- कथित भुगतान नेटवर्क: कांके पेट्रोल पंप फायरिंग मामले की जांच में पुलिस को गिरोह के कथित भुगतान नेटवर्क के बारे में भी जानकारी मिली। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार शमशाद अंसारी ने पूछताछ में गिरोह के सदस्यों को हर महीने करीब 40 हजार रुपये और प्रत्येक वारदात के लिए 20 से 25 हजार रुपये अलग से दिए जाने की बात बताई।
पुलिस जांच में एफआईआर में राजेंद्र महली, नितेश उरांव उर्फ मनीष तिर्की और दीपक लोहरा समेत अन्य नाम भी सामने आए हैं। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
दोनों ‘राहुल’ गिरोहों में क्या समानता?
राहुल दुबे और राहुल सिंह गिरोह के मामलों में एक समान पैटर्न पुलिस जांच में दिखाई देने का दावा किया गया है। कारोबारियों या निर्माण परियोजनाओं को कथित तौर पर पहले धमकी दी जाती है। इसके बाद फायरिंग, आगजनी या अन्य आपराधिक घटना को अंजाम दिया जाता है।
घटना के बाद सोशल मीडिया पोस्ट, व्हाट्सएप मैसेज या पर्चे के जरिए कथित तौर पर जिम्मेदारी लेने की कोशिश की जाती है। इससे दूसरे कारोबारियों और ठेकेदारों के बीच डर का माहौल बनाने की कोशिश का आरोप है।
हालांकि, किसी सोशल मीडिया पोस्ट या पर्चे को अपने आप में घटना की जिम्मेदारी की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता। पुलिस को तकनीकी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इसकी पुष्टि करनी होती है।
रांची में पुलिस की कार्रवाई तेज
दोनों गिरोहों से जुड़े मामलों के बाद रांची पुलिस ने कार्रवाई तेज की है।
राहुल दुबे गिरोह से जुड़े आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान धुर्वा थाना क्षेत्र के सीठियो में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई। इसमें एक आरोपी के पैर में गोली लगी। पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ हथियार, मैगजीन, कार और बाइक बरामद करने का दावा किया।
वहीं, राहुल सिंह गिरोह से जुड़े मामले में नयासराय रेलवे लाइन के पास हुई मुठभेड़ में शूटर शाहिद के घायल होने और उसके साथी की गिरफ्तारी हुई।
पुलिस अब दोनों गिरोहों के आर्थिक नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई, शूटरों की भर्ती और कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ फायरिंग की घटनाओं को रोकने की नहीं है। असली चुनौती उन नेटवर्क को तोड़ने की है, जिनके जरिए कथित तौर पर रंगदारी की रकम, हथियार और शूटरों तक निर्देश पहुंचते हैं।
हथियार कहां से आ रहे हैं, रंगदारी की रकम किस नेटवर्क तक पहुंच रही है, वारदात के लिए शूटरों को कौन निर्देश देता है और सोशल मीडिया के जरिए धमकी और जिम्मेदारी लेने वाले पोस्ट कौन तैयार करता है—जांच का फोकस इन सवालों पर है।
राहुल दुबे के विदेश से नेटवर्क संचालित करने और उसके कथित विदेशी संपर्कों को लेकर भी दावे सामने आते रहे हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
फिलहाल पुलिस ने कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है और मुठभेड़ों में कार्रवाई भी की है। लेकिन झारखंड के कोयलांचल में रंगदारी और वर्चस्व की गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए गिरोहों के आर्थिक नेटवर्क, हथियार सप्लाई और कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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