झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र 2025 कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर शुरू हुआ है और पहले ही दिन से सरकार व विपक्ष के बीच तनाव दिखाई देने लगा है। सत्र का पूरा फोकस छात्रों की लंबित छात्रवृत्ति, किसानों से धान खरीद की धीमी प्रक्रिया, और राज्य के दूसरे अनुपूरक बजट पर केंद्रित है। Khabar Mantra इस पूरे सत्र की हर प्रमुख गतिविधि व बहस को लाइव अपडेट के रूप में आपके सामने रख रहा है।
सत्र का मुख्य एजेंडा: क्या बदलेगा छात्रों और किसानों का हाल?
शीतकालीन सत्र की शुरुआत सरकार के विधायी कार्यों से हुई, लेकिन विपक्ष ने साफ संकेत दिया है कि इस बार चर्चा केवल नीतियों पर नहीं, बल्कि उन मुद्दों पर होगी जो सीधे आम जनता को प्रभावित कर रहे हैं। छात्रवृत्ति में देरी और धान खरीद केंद्रों के न खुलने को लेकर सदन में बहस तेज होने की संभावना है।
विपक्ष के निशाने पर सरकार: छात्रवृत्ति में देरी से लाखों छात्र प्रभावित
विपक्ष ने सबसे बड़ा मुद्दा छात्रवृत्ति भुगतान में हो रही देरी को बनाया है। कई जिलों में छात्रों ने पिछले महीनों से भुगतान न मिलने की शिकायत की है, जिसके कारण कॉलेज फीस, पढ़ाई से जुड़े खर्च और आगे की शिक्षा योजनाओं पर असर पड़ा है।
नेताओं का कहना है कि सरकार दावा तो करती है कि छात्रवृत्ति नियमित है, लेकिन ज़मीनी हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। सदन में विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि बजट में प्रावधान होने के बावजूद भुगतान में देरी आखिर क्यों हो रही है।
धान खरीद पर सरकार को घेरने की तैयारी: किसान बिचौलियों के भरोसे
धान खरीद को लेकर भी विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। वादों के बावजूद अब तक कई इलाकों में धान खरीद केंद्र पूरी तरह से शुरू नहीं हुए हैं।
इस देरी के कारण किसान मजबूर होकर अपनी फसल कम कीमत पर बिचौलियों को बेच रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ तभी मिलेगा जब खरीद प्रक्रिया समय पर और पारदर्शी तरीके से शुरू की जाए।
दूसरा अनुपूरक बजट: क्या शिक्षा और कृषि को मिलेगा पर्याप्त समर्थन?
शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य का दूसरा अनुपूरक बजट पेश किया जा रहा है। यह बजट इस बात पर महत्वपूर्ण संकेत देगा कि सरकार शिक्षा, छात्रवृत्ति योजनाओं, कृषि सहायता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कितना प्राथमिकता दे रही है।
विपक्ष ने मांग की है कि बजट में ऐसी योजनाओं और मदों पर स्पष्टता लाई जाए जो सीधे छात्रों, किसानों और गरीब परिवारों पर प्रभाव डालती हैं।
सत्र के बीच मौसम और कृषि संबंधित अपडेट भी महत्वपूर्ण
इस समय राज्य में ठंड और शीतलहर की स्थिति बनी हुई है, जिसका असर फसलों पर भी पड़ सकता है। खेती से जुड़े विशेषज्ञों ने किसानों को सावधानी और फसल सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है।
धान खरीद में देरी और मौसम के अचानक बदलते स्वरूप के चलते किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
क्या इस सत्र में समाधान मिल पाएगा?
विधानसभा का यह सत्र राज्य की शिक्षा व्यवस्था और कृषि ढांचे से जुड़े दो सबसे बड़े सवालों को सामने लेकर आया है।
यदि सरकार छात्रवृत्ति वितरण को सुचारु करती है और धान खरीद प्रक्रिया को तेज करती है, तो इसका सीधा असर लाखों छात्रों और किसानों के जीवन पर पड़ेगा।
इसके विपरीत, देरी या लापरवाही जनता में अविश्वास को और बढ़ा सकती
यह सत्र झारखंड सरकार की नीतिगत प्रतिबद्धता की परीक्षा है। विपक्ष पहले दिन से ही आक्रामक है, और जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार सत्र के दौरान कितनी गंभीरता से इन मुद्दों को हल करने का प्रयास करती है।
हम इस सत्र की हर बड़ी गतिविधि, बहस और सरकारी निर्णय को लगातार अपडेट करते रहेंगे ताकि आप तक सबसे तेज़ और सटीक खबर पहुँचती रहे।











