Ranchi: झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—JMM कोटे के खाली हुए दो मंत्री पदों पर आखिर किसे जगह मिलेगी? सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद कैबिनेट में एक और जगह खाली हुई है, जबकि रामदास सोरेन के निधन के बाद से एक मंत्री पद पहले से रिक्त है।
यानी अब मुख्यमंत्री और JMM नेतृत्व के सामने सिर्फ दो नाम चुनने की चुनौती नहीं है, बल्कि ऐसा राजनीतिक समीकरण तैयार करने की चुनौती है, जिसमें क्षेत्र, जातीय समीकरण, संगठन, गठबंधन और आने वाले चुनावों की राजनीति—सबको साधा जा सके।
वर्तमान कैबिनेट में JMM के हिस्से में सात, कांग्रेस के हिस्से में चार और RJD के हिस्से में एक मंत्री पद का फॉर्मूला रहा है। ऐसे में JMM के कोटे के दो पद खाली होने के बाद स्वाभाविक तौर पर JMM के भीतर दावेदारों को लेकर चर्चा तेज है।
लेकिन इन दो पदों के लिए सिर्फ मौजूदा विधायकों के नाम ही चर्चा में नहीं हैं। अगर पार्टी राजनीतिक परिस्थितियों के मुताबिक कोई अलग रणनीति अपनाती है, तो गिरिडीह से सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा, टुंडी से मथुरा प्रसाद महतो, गांडेय से कल्पना सोरेन, भवनाथपुर से अनंत प्रताप देव, रामदास सोरेन के बेटे सोमेश सोरेन और जमशेदपुर से समीर मोहंती जैसे नाम अलग-अलग समीकरणों में सामने आ सकते हैं।
पहला नाम: क्या सुदिव्य सोनू की राजनीतिक विरासत संभालेंगी श्वेता शर्मा?
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद सबसे ज्यादा चर्चा गिरिडीह सदर विधानसभा क्षेत्र को लेकर है। सवाल यह है कि JMM इस सीट को किस तरह देखती है और क्या पार्टी सुदिव्य सोनू की राजनीतिक विरासत को उनके परिवार के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी?
इसी संभावित समीकरण में श्वेता शर्मा का नाम महत्वपूर्ण हो जाता है।
सुदिव्य सोनू JMM के महत्वपूर्ण नेताओं में शामिल थे और मुख्यमंत्री के राजनीतिक संघर्ष के दौर में भी वह पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े रहे। ऐसे में उनके निधन के बाद पार्टी के सामने एक तरफ भावनात्मक और राजनीतिक विरासत का सवाल है, तो दूसरी तरफ गिरिडीह सदर में संगठन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती भी है।
अगर श्वेता शर्मा राजनीति में आने के लिए तैयार होती हैं और पार्टी उन्हें उपयुक्त चेहरा मानती है, तो JMM के सामने एक ऐसा विकल्प हो सकता है, जिसमें सहानुभूति, राजनीतिक विरासत और गिरिडीह सीट पर पकड़—तीनों समीकरण एक साथ साधे जा सकते हैं।
यहीं से 2021 के ‘मधुपुर मॉडल’ की चर्चा भी शुरू होती है।
हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद उनके बेटे हफीजुल हसन को विधायक नहीं होने के बावजूद मंत्री बनाया गया था। बाद में उन्होंने मधुपुर विधानसभा उपचुनाव जीता और अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की।
ऐसे में सवाल उठता है—क्या JMM गिरिडीह में भी कुछ ऐसा ही प्रयोग कर सकती है?
हालांकि यह तभी संभव होगा जब श्वेता शर्मा खुद चुनावी राजनीति में आने के लिए तैयार हों और पार्टी नेतृत्व भी इस विकल्प को स्वीकार करे। इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक रणनीति के तौर पर ही देखा जा रहा है।
दूसरा नाम: मथुरा प्रसाद महतो, अनुभव के साथ महतो समुदाय का समीकरण
अगर JMM किसी मौजूदा विधायक को सीधे कैबिनेट में शामिल करने का फैसला करती है, तो टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो की दावेदारी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
मथुरा महतो JMM के पुराने और अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। वह पहले भी मंत्री रह चुके हैं और संगठन तथा सरकार दोनों स्तरों पर काम करने का अनुभव रखते हैं। पार्टी की पुरानी टीम के सदस्य होने के कारण उन्हें झारखंड की राजनीति और JMM के संगठनात्मक ढांचे की अच्छी समझ है।
लेकिन उनकी दावेदारी का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू सिर्फ अनुभव नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण भी है।
मथुरा प्रसाद महतो महतो समुदाय से आते हैं और मौजूदा कैबिनेट में महतो समुदाय का कोई मंत्री नहीं है। ऐसे में अगर JMM खाली हुए दो पदों में से एक पर महतो समुदाय को प्रतिनिधित्व देती है, तो मथुरा महतो इसके लिए स्वाभाविक चेहरा बन सकते हैं।
झारखंड की राजनीति में महतो समुदाय का प्रभाव कई विधानसभा क्षेत्रों में देखने को मिलता है। ऐसे में मथुरा महतो को कैबिनेट में जगह देकर JMM एक साथ अनुभव, संगठन और सामाजिक प्रतिनिधित्व का समीकरण साध सकती है।
यही वजह है कि मथुरा महतो का नाम सिर्फ एक पुराने नेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक संभावित सामाजिक संतुलन वाले चेहरे के तौर पर भी देखा जा रहा है।
अगर JMM को लगता है कि कैबिनेट में महतो समुदाय की मौजूदगी जरूरी है, तो मथुरा महतो की संभावना और मजबूत हो सकती है।
तीसरा नाम: कल्पना सोरेन, क्या महिला नेतृत्व के साथ गठबंधन का भी साधा जाएगा समीकरण?
तीसरा नाम कल्पना सोरेन का है और यह नाम सामने आने पर पूरा राजनीतिक समीकरण और दिलचस्प हो जाता है।
गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन JMM की प्रमुख राजनीतिक चेहरों में शामिल हैं। अगर उन्हें कैबिनेट में शामिल किया जाता है, तो इसका संदेश सिर्फ महिला प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहेगा। इसे पार्टी के भविष्य के राजनीतिक नेतृत्व और संगठनात्मक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा सकता है।
लेकिन यहां एक और महत्वपूर्ण सवाल है—अगर कांग्रेस 12वें मंत्री पद पर दावा करती है तो क्या JMM कल्पना सोरेन को आगे करके गठबंधन के भीतर सहमति बना सकती है?
यह एक संभावित राजनीतिक रास्ता हो सकता है।
अगर कांग्रेस खाली हुए पदों में से किसी एक पर अपना दावा रखती है, तो JMM के सामने गठबंधन संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी। ऐसी स्थिति में कल्पना सोरेन को मंत्री बनाए जाने के प्रस्ताव पर कांग्रेस की सहमति बनाना पार्टी के लिए अपेक्षाकृत आसान विकल्प हो सकता है—हालांकि यह पूरी तरह राजनीतिक बातचीत और गठबंधन के समीकरण पर निर्भर करेगा।
दूसरी तरफ क्षेत्रीय संतुलन भी महत्वपूर्ण है। गोमिया से योगेंद्र प्रसाद, गांडेय से कल्पना सोरेन और टुंडी से मथुरा महतो जैसे चेहरे एक ही व्यापक इलाके को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देते हैं। अगर इसी क्षेत्र से एक से ज्यादा मंत्री बनाए जाते हैं, तो राज्य के दूसरे हिस्सों को प्रतिनिधित्व देने का सवाल उठ सकता है।
इसलिए कल्पना सोरेन की दावेदारी मजबूत होने के बावजूद क्षेत्रीय संतुलन उनके पक्ष और विपक्ष दोनों में जा सकता है।
चौथा नाम: अनंत प्रताप देव, क्या JMM साधेगी गढ़वा-पलामू का समीकरण?
भवनाथपुर से पहली बार JMM विधायक बने अनंत प्रताप देव भी संभावित चेहरों की सूची में जगह बना सकते हैं।
अनंत प्रताप देव के पास राजनीति का पुराना अनुभव है। वह 2009 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। अब JMM के टिकट पर विधानसभा पहुंचने के बाद अगर उन्हें मंत्री पद दिया जाता है, तो पार्टी के पास गढ़वा और पलामू क्षेत्र में अपना राजनीतिक प्रभाव मजबूत करने का मौका होगा।
यह विकल्प खास तौर पर तब महत्वपूर्ण हो सकता है जब JMM कैबिनेट में क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता देना चाहे।
यानी मथुरा महतो का चयन सामाजिक समीकरण साध सकता है, कल्पना सोरेन का चयन महिला और नेतृत्व का संदेश दे सकता है, जबकि अनंत प्रताप देव को जगह देना गढ़वा-पलामू क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है।
रामदास सोरेन के बाद खाली पद पर फिर उठ सकता है बेटे सोमेश सोरेन का नाम?
इन सभी नामों के बीच एक और राजनीतिक संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
रामदास सोरेन के निधन के बाद उनका मंत्री पद खाली हुआ था। उस समय भी उनके परिवार और राजनीतिक विरासत को लेकर चर्चा हुई थी। ऐसे में अगर JMM उस खाली पद को परिवार और राजनीतिक विरासत के समीकरण से जोड़कर देखती है, तो रामदास सोरेन के बेटे सोमेश सोरेन का नाम भी चर्चा में आ सकता है।
हालांकि यह फिलहाल एक संभावित राजनीतिक चर्चा है और इसे पार्टी की ओर से आधिकारिक दावेदारी नहीं माना जा सकता।
फिर भी JMM के लिए यह विकल्प राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। रामदास सोरेन लंबे समय तक पार्टी के आदिवासी नेतृत्व का हिस्सा रहे। ऐसे में उनके परिवार को राजनीतिक जिम्मेदारी देना आदिवासी प्रतिनिधित्व और राजनीतिक विरासत—दोनों को साधने का प्रयास माना जा सकता है।
यानी अगर पार्टी पुराने राजनीतिक परिवारों और क्षेत्रीय प्रभाव को महत्व देती है, तो सोमेश सोरेन का नाम भी समीकरण में आ सकता है।
क्या बहरागोड़ा से समीर कुमार मोहंती की हो सकती है एंट्री?
संभावित दावेदारों की चर्चा में बहरागोड़ा विधायक समीर कुमार मोहंती का नाम भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। JMM के पुराने राजनीतिक चेहरों में शामिल समीर मोहंती पूर्वी सिंहभूम और व्यापक कोल्हान क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
अगर JMM इस बार मंत्री पद के जरिए कोल्हान क्षेत्र को मजबूत प्रतिनिधित्व देने का फैसला करती है, तो समीर मोहंती एक संभावित विकल्प हो सकते हैं।
यह समीकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कैबिनेट विस्तार में सिर्फ जातीय या व्यक्तिगत समीकरण ही काम नहीं करेंगे। पार्टी को यह भी देखना होगा कि सरकार में झारखंड के अलग-अलग क्षेत्रों की राजनीतिक भागीदारी कैसी दिख रही है।
ऐसे में एक तरफ धनबाद-गिरिडीह क्षेत्र से मथुरा प्रसाद महतो की दावेदारी सामाजिक समीकरण को साध सकती है, वहीं दूसरी तरफ बहरागोड़ा से समीर मोहंती को मौका देकर JMM कोल्हान और पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व दे सकती है।
हालांकि समीर मोहंती की दावेदारी तभी मजबूत मानी जाएगी, जब पार्टी का फोकस इस बार क्षेत्रीय संतुलन पर ज्यादा हो। ऐसे में उनके सामने मथुरा महतो, कल्पना सोरेन, अनंत प्रताप देव और दूसरे संभावित चेहरों के मुकाबले सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि JMM इस बार किस क्षेत्र को प्राथमिकता देती है।
यानी अगर पार्टी का फोकस सामाजिक समीकरण पर रहता है तो मथुरा महतो मजबूत विकल्प हो सकते हैं, अगर महिला नेतृत्व और गठबंधन का समीकरण महत्वपूर्ण होता है तो कल्पना सोरेन का नाम आगे आ सकता है, जबकि क्षेत्रीय संतुलन में समीर मोहंती जैसे कोल्हान के चेहरे की संभावना बन सकती है।
कांग्रेस अगर 12वें मंत्री पद पर दावा करे तो क्या बदलेगा पूरा गणित?
पूरे कैबिनेट विस्तार का सबसे बड़ा पेंच गठबंधन की राजनीति हो सकती है।
JMM के दो मंत्री पद खाली हुए हैं, इसलिए पहली नजर में इन दोनों पर JMM का दावा सबसे स्वाभाविक है। लेकिन अगर कांग्रेस 12वें मंत्री पद को लेकर अपना दावा रखती है, तो स्थिति बदल सकती है।
ऐसे में JMM को सिर्फ अपने विधायकों के बीच संतुलन नहीं बनाना होगा, बल्कि कांग्रेस के साथ भी राजनीतिक समझ बनानी होगी।
यहीं कल्पना सोरेन का नाम एक संभावित समझौते के चेहरे के रूप में सामने आ सकता है। अगर JMM उन्हें कैबिनेट में शामिल करना चाहती है और कांग्रेस भी गठबंधन के हित में इसका समर्थन करती है, तो एक राजनीतिक सहमति बन सकती है।
हालांकि यह सिर्फ एक संभावित समीकरण है। कांग्रेस वास्तव में क्या दावा करती है और JMM उसका जवाब किस तरह देती है, यह आने वाले दिनों की राजनीतिक बातचीत से स्पष्ट होगा।
एक नजर में JMM के सामने संभावित चेहरे
श्वेता शर्मा — सुदिव्य सोनू की राजनीतिक विरासत और गिरिडीह सदर का समीकरण।
मथुरा प्रसाद महतो — अनुभव के साथ महतो समुदाय को कैबिनेट प्रतिनिधित्व देने का विकल्प।
कल्पना सोरेन — महिला नेतृत्व, पार्टी की भविष्य की राजनीति और गठबंधन के समीकरण का चेहरा।
अनंत प्रताप देव — गढ़वा-पलामू क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने की संभावना।
सोमेश सोरेन — रामदास सोरेन की राजनीतिक विरासत और आदिवासी प्रतिनिधित्व का समीकरण।
समीर मोहंती — जमशेदपुर और कोल्हान क्षेत्र को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का विकल्प।
राजनीतिक गणित में कौन सा फॉर्मूला सबसे दिलचस्प?
अगर पूरे समीकरण को देखें तो JMM के सामने कई संभावनाएं हैं।
फॉर्मूला 1: श्वेता शर्मा + मथुरा महतो
→ गिरिडीह की राजनीतिक विरासत + महतो समुदाय का प्रतिनिधित्व।
फॉर्मूला 2: मथुरा महतो + कल्पना सोरेन
→ OBC प्रतिनिधित्व + महिला नेतृत्व।
फॉर्मूला 3: मथुरा महतो + अनंत प्रताप देव
→ सामाजिक समीकरण + गढ़वा-पलामू क्षेत्र।
फॉर्मूला 4: श्वेता शर्मा + मथुरा महतो
→ सुदिव्य सोनू की विरासत + महतो समुदाय का प्रतिनिधित्व, और गिरिडीह में आगे की राजनीतिक रणनीति।
फॉर्मूला 5: सोमेश सोरेन + किसी दूसरे क्षेत्रीय चेहरे
→ रामदास सोरेन की राजनीतिक विरासत + क्षेत्रीय संतुलन।
फॉर्मूला 6: अगर कांग्रेस 12वें मंत्री पद पर दावा करती है, तो JMM के पास गठबंधन की सहमति से कल्पना सोरेन जैसे चेहरे को आगे बढ़ाने का विकल्प भी हो सकता है।
असली फैसला दो मंत्री चुनने का नहीं, कई समीकरण साधने का
झारखंड कैबिनेट में खाली हुए दो पद JMM के लिए एक साथ चुनौती और अवसर दोनों हैं।
सुदिव्य सोनू की राजनीतिक विरासत, महतो समुदाय का प्रतिनिधित्व, आदिवासी नेतृत्व, महिला राजनीति, कोल्हान और पलामू-गढ़वा का क्षेत्रीय संतुलन और कांग्रेस के साथ गठबंधन की मजबूती—इन सभी सवालों का जवाब इन दो नियुक्तियों में कहीं न कहीं दिखाई दे सकता है।
यही कारण है कि फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि JMM सिर्फ सबसे वरिष्ठ नेताओं को मंत्री बनाएगी या फिर कोई ऐसा राजनीतिक प्रयोग करेगी, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों तक दिखाई दे।
मथुरा महतो का नाम अनुभव और महतो समुदाय के प्रतिनिधित्व के कारण मजबूत दिखाई देता है। श्वेता शर्मा का नाम गिरिडीह और सुदिव्य सोनू की विरासत के कारण चर्चा में है। कल्पना सोरेन का नाम महिला नेतृत्व और गठबंधन के समीकरण से जुड़ता है। अनंत प्रताप देव क्षेत्रीय संतुलन का विकल्प हैं। वहीं सोमेश सोरेन और समीर मोहंती जैसे नाम पार्टी के सामने अलग-अलग राजनीतिक रास्ते खोलते हैं।
आखिरकार दो मंत्री पदों पर होने वाला फैसला यह बताएगा कि JMM फिलहाल सरकार चला रही है या 2029 की राजनीतिक जमीन भी साथ-साथ तैयार कर रही है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
Expertise: Journalism • Digital Media • Ground Reporting • Content & Social Media • Video Production • News Analysis








