Jharkhand: झारखंड के पूर्व मंत्री, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और धनबाद के पूर्व विधायक मन्नान मल्लिक का मंगलवार को रांची के पल्स अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही धनबाद की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे मन्नान मल्लिक ने मंगलवार को अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं, समर्थकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं में शोक की लहर दौड़ गई।
कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने में निभाई अहम भूमिका
मन्नान मल्लिक धनबाद में कांग्रेस का मजबूत चेहरा माने जाते थे। उन्होंने वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में धनबाद सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया। इसके बाद वर्ष 2013 में हेमंत सोरेन सरकार में उन्हें आपदा प्रबंधन, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग का मंत्री बनाया गया।
धनबाद जिला कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे लंबे समय तक जिला कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे और अल्पसंख्यक समाज सहित शहर के विभिन्न वर्गों में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती थी। विधायक के रूप में उन्होंने सड़क, पेयजल, बिजली और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दों को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया।
निधन से चार दिन पहले आया था अदालत का फैसला
मन्नान मल्लिक के निधन से ठीक चार दिन पहले धनबाद के चर्चित मटकुरिया गोलीकांड मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने फैसला सुनाया था। करीब 15 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद हाल ही में विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने मन्नान मल्लिक सहित कई आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। बीमारी के कारण वे अदालत में उपस्थित नहीं हो सके थे। उच्च न्यायालय में अपील दायर करने के लिए उन्हें और उनके लड़के को जमानत नहीं मिली थी, चूंकि उन्होंने अदालत में बंद पत्र दाखिल नहीं किया था।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 353 और 435 के तहत सभी दोषियों को अधिकतम तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, यह मामला न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा था और उनके निधन के कारण आगे की कानूनी प्रक्रिया पर संबंधित प्रावधानों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
Jharkhand: नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दी श्रद्धांजलि
मन्नान मल्लिक का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा। वर्ष 2005 में उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2009 में उन्होंने दमदार वापसी करते हुए विधायक का चुनाव जीता। इसके बाद 2014 और 2019 के विधानसभा चुनावों में उन्हें पराजय मिली, फिर भी वे कांग्रेस के वरिष्ठ और सक्रिय नेताओं में शामिल रहे तथा संगठनात्मक गतिविधियों में लगातार जुड़े रहे।
उनके निधन पर कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें जनसरोकारों से जुड़े, सरल स्वभाव के नेता के रूप में याद करते हुए कहा कि उनके निधन से धनबाद ही नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति ने एक अनुभवी जननेता को खो दिया है।







