Jharkhand News: झारखंड में निजी कॉलेजों की मनमानी फीस पर लगाम लगाने के लिए राज्यपाल संतोष गंगवार ने झारखंड व्यावसायिक शिक्षण संस्थान (शुल्क विनियमन) विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी. बता दें, यह विधेयक मानसून सत्र में पारित हुआ था और अब विधि विभाग द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा.
निजी संस्थानों की मनमानी फीस पर लगेगी रोक
इस अधिनियम के लागू होने के बाद राज्य के निजी इंजीनियरिंग और प्रबंधन कॉलेजों की मनमानी फीस पर रोक लग जाएगी। अब इन संस्थानों की फीस का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा संस्थान की सुविधाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों की संख्या के आधार पर किया जाएगा।
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विधेयक का मुख्य उद्देश्य निजी कॉलेजों में अनुचित शुल्क वसूली पर अंकुश लगाना और छात्रों व अभिभावकों को राहत देना है। सरकार को इस विषय पर लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि निजी संस्थान मनमानी फीस वसूल रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
विधेयक में सर्वोच्च न्यायालय के इस्लामिक एकेडमिक ऑफ एजुकेशन बनाम कर्नाटक राज्य (2003) और पी.ए. इनामदार बनाम महाराष्ट्र राज्य (2005) मामलों का हवाला दिया गया है, जिनमें कहा गया था कि शिक्षण संस्थान अपनी फीस तय कर सकते हैं, लेकिन मुनाफाखोरी और कैपिटेशन फीस पर रोक जरूरी है।
महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में पहले से यह व्यवस्था लागू है, जबकि झारखंड में यह प्रणाली अब पहली बार लागू होगी।
महिला और एकल पुरुष शिक्षकों को मिलेगी 2 साल की चाइल्ड केयर लीव
राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत महिला शिक्षकों और कर्मचारियों को दो वर्ष (730 दिन) की चाइल्ड केयर लीव देने के संशोधन को भी मंजूरी दी है।
यह सुविधा अब एकल पुरुष शिक्षकों और कर्मचारियों को भी मिलेगी। अवकाश की अवधि में पहले 365 दिनों तक पूरा वेतन और अगले 365 दिनों के लिए 80% वेतन दिया जाएगा।
दो परिनियमों में संशोधन को स्वीकृति
- यूजीसी विनियम 2018 के अनुरूप शिक्षकों की नियुक्ति और योग्यता संबंधी परिनियम में संशोधन।
- सातवें वेतन आयोग के अनुसार विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रोन्नति और संवर्ग संरचना के परिनियम में संशोधन।












