Ranchi: झारखंड में लंबे समय से लंबित शहरी निकाय चुनाव को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को सख्त रुख अपनाया। अदालत ने आदेश के बावजूद चुनाव न कराने पर मुख्य सचिव अलका तिवारी, तत्कालीन नगर विकास सचिव विनय कुमार चौबे, गृह सचिव वंदना दादेल और नगर विकास विभाग के अपर सचिव ज्ञानेश कुमार को अवमानना नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट ने कहा- आदेश का पालन न करना है अवमानना
जस्टिस आनंद सेन की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कहा गया कि अदालत का आदेश पालन न करना सीधा-सीधा न्यायालय की अवमानना है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी और उस दिन चारों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। अदालत ने साफ कर दिया है कि हाई कोर्ट रूल 393 के तहत अधिकारियों पर आरोप गठित किए जाएंगे।
बिना ट्रिपल टेस्ट के चुनाव कराने का था आदेश
मामला उस अवमानना याचिका से जुड़ा है, जिसे पूर्व पार्षद रोशनी खलखो ने दाखिल किया था। सरकार बार-बार “ट्रिपल टेस्ट” प्रक्रिया का हवाला देकर चुनाव टाल रही थी। लेकिन अदालत ने पहले ही 4 जनवरी 2024 को आदेश दिया था कि बिना ट्रिपल टेस्ट के भी शहरी निकाय चुनाव कराए जाएं। इसके बावजूद सरकार ने आदेश को लागू नहीं किया।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: सरकार कानून से खेल रही है
अदालत ने दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि सरकार और उसके अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश को न केवल मंत्री या कैबिनेट के समक्ष नहीं रखा, बल्कि अदालत को कई बार गुमराह भी किया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि चुनाव जल्द होंगे, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अदालत ने टिप्पणी की – “सरकार कानून के साथ खिलवाड़ कर रही है।”
अब 14 अक्टूबर को तय होगा अगला कदम
हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि आदेश की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखना होगा कि 14 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में अधिकारियों का क्या पक्ष सामने आता है और अदालत इस मामले में क्या कड़ा फैसला सुनाती है।












