Jharkhand: झारखंड में आने वाले दिनों में शराब के शौकीनों को बड़ा झटका लग सकता है। राज्य में शराब की आपूर्ति (Liquor Supply) पूरी तरह ठप होने का संकट गहरा गया है। इसका मुख्य कारण झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) पर शराब आपूर्ति करने वाली कंपनियों का 200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया होना है।
अल्कोहलिक बेवरेजेज उद्योग से जुड़े देश के प्रमुख संगठनों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही भुगतान नहीं किया गया, तो राज्य में शराब की किल्लत होना तय है।
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9 महीने से अटका है भुगतान, कर्ज लेकर चल रही सप्लाई
यह पूरा विवाद पिछले साल का है। कंपनियों का यह भारी-भरकम बकाया 31 अगस्त 2025 तक की गई शराब आपूर्ति से जुड़ा हुआ है। करीब 9 महीने का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी कंपनियों को उनकी पूरी रकम नहीं मिली है।
भुगतान न होने के कारण आपूर्ति करने वाली कंपनियां भारी वित्तीय दबाव में हैं। हालत यह हो चुकी है कि ये कंपनियां बैंक और अन्य स्रोतों से कर्ज (Loan) लेकर राज्य में शराब की सप्लाई को किसी तरह जारी रखे हुए हैं। लेकिन अब उनके सब्र का बांध टूट रहा है।
प्रमुख शराब संगठनों ने सरकार से लगाई गुहार
देश में बिकने वाली शराब, बीयर और वाइन के कुल बाजार का 80 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधित्व करने वाले तीन बड़े संगठनों ने इस मामले में राज्य सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। इन संगठनों में शामिल हैं:
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सीआईएबीसी (Confederation of Indian Alcoholic Beverage Companies – CIABC)
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बीएआई (Brewers Association of India – BAI)
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आईएसडब्ल्यूएआई (International Spirits and Wines Association of India – ISWAI)
इन तीनों संगठनों ने झारखंड सरकार को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि राज्य में शराब आपूर्ति के बड़े संकट को टालने के लिए लंबित भुगतानों को तत्काल जारी किया जाए।
फरवरी 2026 में हुआ था सिर्फ 35% भुगतान
ऐसा नहीं है कि सरकार ने बिल्कुल भुगतान नहीं किया, लेकिन ऊँट के मुँह में जीरा वाली कहावत चरितार्थ हुई है। सरकारी कंपनी JSBCL ने फरवरी 2026 में कुल बकाया राशि का लगभग 35 प्रतिशत आंशिक भुगतान जारी किया था।
हालांकि, इसके बाद भी 200 करोड़ रुपये से अधिक की एक बहुत बड़ी राशि अब भी फंसी हुई है। इतने लंबे समय तक भुगतान लटके रहने के कारण कंपनियों की बैलेंस शीट पर बुरा असर पड़ा है और उनकी ‘प्राप्तियों’ (Receivables) का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
क्या शराब की किल्लत से बचेगा झारखंड?
विशेषज्ञों का मानना है कि शराब से राज्य सरकार को बड़ा राजस्व (Revenue) मिलता है। ऐसे में अगर कंपनियों ने सप्लाई रोक दी, तो सरकार को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। अब देखना यह है कि झारखंड सरकार इन प्रमुख कंपनियों के दावों पर कितनी जल्दी एक्शन लेती है और ₹200 करोड़ के इस कबाड़े को कैसे सुलझाती है।
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कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।









