Jharkhand News: झारखंड सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘CM School of Excellence’ (मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय) की शैक्षणिक गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में है। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि इन स्कूलों के मैट्रिक परीक्षा परिणाम को जिला-वार और स्कूल-वार सार्वजनिक किया जाए।
Jharkhand News: पारदर्शिता पर सवाल: आंकड़ों का खेल या हकीकत?
अजय राय के अनुसार, हाल ही में राज्य के कई जिलों से इन उत्कृष्ट विद्यालयों के कमजोर रिजल्ट की खबरें आई हैं। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को केवल पास प्रतिशत नहीं, बल्कि विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। इसमें यह स्पष्ट होना चाहिए कि:
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किस स्कूल से कितने छात्र परीक्षा में शामिल हुए?
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विषय-वार (खासकर गणित और विज्ञान) प्रदर्शन कैसा रहा?
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कितने छात्र फेल हुए या कंपार्टमेंट की श्रेणी में आए?
Jharkhand News: अभिभावकों में अविश्वास का माहौल
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आए, तो अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन इन स्कूलों में कराने से कतराएंगे। अजय राय ने कहा, “खराब परिणाम के लिए केवल बच्चों को जिम्मेदार ठहराना गलत है। इसके लिए शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग की जवाबदेही तय होनी चाहिए।”
एसोसिएशन की मुख्य मांगें:
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सभी 80 उत्कृष्ट विद्यालयों का जिला-वार और स्कूल-वार रिजल्ट सार्वजनिक हो।
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कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों का अकादमिक ऑडिट कराया जाए।
खबर मन्त्र एक्सक्लूसिव पड़ताल एवं विश्लेषणExclusive -
सभी स्कूलों में PTA (अभिभावक-शिक्षक संघ) का गठन अनिवार्य हो।
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शिक्षकों की विषय-वार जवाबदेही तय की जाए।
वर्तमान में राज्य में 80 ऐसे स्कूल चल रहे हैं और 100 और स्कूलों को अपग्रेड करने की तैयारी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि शिक्षा विभाग इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

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