Jharkhand: झारखंड में आदिवासी स्वशासन को मजबूती देने की दिशा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने पेसा एक्ट (PESA Act) की नियमावली को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “सभी विभागों, जनप्रतिनिधियों और लोगों की बात सुनने के बाद यह फैसला लिया गया है। कैबिनेट में व्यापक चर्चा के बाद इसे अपने मूल स्वरूप में जनता को समर्पित किया जा रहा है।”
कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर एक घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई, जिसके बाद सर्वसम्मति से इसे पास किया गया।
झारखंड स्थापना के 25 साल पर ‘दिशोम गुरु’ को समर्पित कानून
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर इस कानून को दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम आदिवासी समाज को उसके संवैधानिक अधिकार दिलाने और गांव स्तर पर सत्ता को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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‘एक ग्राम, एक ग्राम सभा’ पर बनी सहमति
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि उन्होंने प्रस्ताव रखा कि हर राजस्व ग्राम में केवल एक ही ग्राम सभा होगी, भले ही पंचायत समितियां कितनी भी हों। इस पर सभी मंत्रियों ने सहमति जताई।
उन्होंने कहा, “यह राहुल गांधी का सपना था और मुख्यमंत्री भी यही चाहते थे कि ग्राम सभा को असली ताकत मिले।” मंत्री चमरा लिंडा समेत सभी ने इस सुझाव का समर्थन किया।
बालू घाटों पर ग्राम सभा का नियंत्रण: अवैध खनन पर लगेगी लगाम
पेसा नियमावली का सबसे अहम और दूरगामी प्रभाव डालने वाला प्रावधान बालू घाटों का संचालन ग्राम सभा को सौंपना है। अब तक बालू खनन को लेकर अवैध गतिविधियों, माफिया राज और पर्यावरण नुकसान की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
नई व्यवस्था के तहत—
हर बालू घाट का संचालन ग्राम सभा के माध्यम से होगा।
ग्राम सभा यह तय करेगी कि कहां, कितना और किस तरीके से बालू का खनन होगा।
जेसीबी और अन्य भारी मशीनों से बालू खनन पर ग्राम सभा रोक लगा सकेगी।
बालू घाट से मिलने वाली आय का उपयोग गांव के विकास कार्यों में किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे न केवल अवैध खनन पर रोक लगेगी, बल्कि गांवों को आर्थिक रूप से भी मजबूती मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
मछली पालन से शराब दुकान तक, अब गांव तय करेगा फैसले
मछली पालन पर अधिकार
एक एकड़ से कम जल क्षेत्र पर ग्राम सभा का नियंत्रण होगा। मछली पालन होगा या नहीं, और उससे निकली मछली का उपयोग कैसे होगा—यह फैसला भी ग्राम सभा ही करेगी।
शराब दुकानों पर ग्राम सभा की मुहर जरूरी
देसी या विदेशी शराब की दुकान खोलने से पहले अब ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य होगी। ग्राम सभा के फैसले की अनदेखी कर कोई दुकान नहीं खुल सकेगी। इससे गांवों में नशे पर नियंत्रण की उम्मीद की जा रही है।
छोटे अपराधों की सुनवाई गांव में ही
घर में चोरी, मवेशी चोरी, जमीन पर कब्जे की कोशिश और हल्की मारपीट जैसे मामलों की सुनवाई ग्राम सभा करेगी।
ग्राम सभा दो हजार रुपये तक जुर्माना भी लगा सकेगी, हालांकि इस प्रावधान में कुछ संशोधन प्रस्तावित हैं। इससे छोटे विवादों का समाधान गांव में ही संभव हो सकेगा।
स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों पर ग्राम सभा की नजर
पंचायतों में चल रहे स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन में भी ग्राम सभा हस्तक्षेप कर सकेगी। शिक्षक, डॉक्टर या पैरामेडिकल कर्मियों की अनुपस्थिति पर ग्राम सभा कार्रवाई की अनुशंसा करेगी।
अन्य प्रमुख प्रावधान
लघु खनिज की रॉयल्टी ग्राम सभा कोष में जमा होगी।
एसटी जमीन को वापस कराने का अधिकार ग्राम सभा को मिलेगा।
जंगलों की सुरक्षा, संवर्द्धन और प्रबंधन ग्राम सभा करेगी।
लघु वनोपज के न्यूनतम मूल्य और रॉयल्टी तय करने का अधिकार।
गिरफ्तारी से पहले पुलिस ग्राम सभा की सहमति लेने का प्रयास करेगी और 48 घंटे में कारण बताएगी।
नगर निगम क्षेत्र के गांवों पर PESA का असर होगा या नहीं?
PESA Act मूल रूप से अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) के लिए बना कानून है। इसका मतलब यह है कि इसका सीधा लाभ उन्हीं गांवों को मिलेगा जो सरकार द्वारा अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र में आते हैं और जहां ग्राम सभा का गठन पंचायत व्यवस्था के तहत होता है।
झारखंड में कई ऐसे गांव हैं जो पहले ग्रामीण क्षेत्र थे, लेकिन बाद में उन्हें नगर निगम या नगर परिषद में शामिल कर दिया गया। ऐसे इलाकों में फिलहाल नगर निकाय कानून लागू होता है, न कि पंचायती राज व्यवस्था।
विशेषज्ञों और अधिकारियों के मुताबिक:
जो गांव अब नगर निगम क्षेत्र में आ चुके हैं, वहां फिलहाल PESA Act सीधे लागू नहीं होगा।
क्योंकि वहां ग्राम सभा की जगह वार्ड समिति और नगर निकाय प्रशासन काम करता है।
जब तक सरकार इन क्षेत्रों को दोबारा ग्रामीण/पंचायती ढांचे में नहीं लाती या कोई अलग अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक PESA के प्रावधान लागू नहीं माने जाएंगे।
हालांकि, यह भी चर्चा में है कि—
अगर कोई गांव ऐतिहासिक रूप से आदिवासी बहुल रहा है और उसे सिर्फ प्रशासनिक कारणों से नगर सीमा में जोड़ा गया है, तो भविष्य में सरकार विशेष प्रावधान या संशोधन ला सकती है।
कई सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि ऐसे गांवों को भी ग्राम सभा के अधिकार दिए जाएं।
क्या है PESA Act?
पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 यानी पेसा एक्ट का उद्देश्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को संवैधानिक अधिकार देकर स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना है।
झारखंड में पेसा एक्ट की नियमावली को मंजूरी मिलना राज्य के आदिवासी इलाकों के लिए ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। खासकर बालू घाटों का नियंत्रण ग्राम सभा को सौंपना अवैध खनन और माफिया पर सीधा प्रहार है। मछली पालन, शराब दुकान, जंगल, खनन और छोटे अपराध—हर स्तर पर अब गांव की आवाज निर्णायक होगी।
अगर यह व्यवस्था जमीन पर सही तरीके से लागू हुई, तो झारखंड में ग्राम स्वराज और आदिवासी स्वशासन की नई शुरुआत होगी।












