Jharkhand Politics: देश में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है और अब चुनावी सरगर्मियां धीरे-धीरे तेज होती नजर आ रही हैं। बात अगर असम की करें, तो वहां की राजनीति का असर झारखंड में भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। सोमवार शाम झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी की, जिससे यह संकेत मिल गया है कि पार्टी असम चुनाव को लेकर गंभीर है।
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लंबी है स्टार प्रचारकों की सूची
जारी सूची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन समेत कई मंत्री और विधायक शामिल हैं। इससे साफ है कि हेमंत सोरेन असम में पार्टी की मौजूदगी मजबूत करने के मूड में हैं।
Jharkhand Politics: विपक्ष ने हेमंत सरकार पर कसा तंज
स्टार प्रचारकों की सूची सामने आते ही विपक्ष ने तंज कसना शुरू कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले मजाकिया लहजे में कहा कि झामुमो ने पहले बिहार चुनाव में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन उसका परिणाम सबको पता है। अब पार्टी असम में चुनाव लड़ने की हिम्मत जुटा रही है, देखना होगा कि वह कितनी सफल हो पाती है।
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Jharkhand Politics: झामुमो कांग्रेस और स्थानीय दलों से कर रही बात
अगर अंदरूनी जानकारी पर नजर डालें, तो झामुमो असम में कांग्रेस और स्थानीय दलों के संपर्क में है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी असम की ट्राइबल सीटों पर खास फोकस कर रही है। राज्य में कुल 29 ट्राइबल सीटें हैं, जहां टी-ट्राइब समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है। ऐसे में झामुमो की रणनीति इन वोटरों को साधने की नजर आ रही है।
टी-ट्राइब पर झामुमो की नजारा
गौरतलब है कि असम में टी-ट्राइब समुदाय को ओबीसी सूची में रखा गया है, जबकि वे लंबे समय से खुद को एसटी/एससी सूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। माना जा रहा है कि हेमंत सोरेन इस सामाजिक समीकरण को समझते हुए ट्राइबल राजनीति को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
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बिहार में महागठबंधन से झामुमो को मिला था धोखा
हालांकि, बाबूलाल मरांडी के बयान को देखें तो यह भी सच है कि झामुमो ने बिहार में चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, लेकिन महागठबंधन से उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। अब असम चुनाव में पार्टी क्या रणनीति अपनाती है और क्या वह अपने उम्मीदवार उतार पाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।












