Jharkhand: ऑपरेशन WILEP के तहत एक बड़ी कार्रवाई में, धनबाद डिवीज़न के रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स ने योगनगरी ऋषिकेश-हावड़ा दून एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 13010) के महिला कोच से 35 ज़िंदा कछुए बरामद किए। कछुए लावारिस हालत में मिले और उनकी पहचान इंडियन फ़्लैपशेल टर्टल के तौर पर हुई, जिनकी कीमत लगभग ₹3.5 लाख है।
यह घटना बुधवार को सामने आई। प्लेटफ़ॉर्म पर रूटीन पेट्रोलिंग के दौरान, सीनियर डिवीज़नल सिक्योरिटी कमिश्नर के निर्देशों पर, RPF की एक टास्क टीम को गार्ड के ब्रेक वैन के पास वाले महिला कोच में वाइल्डलाइफ़ स्मगलिंग की सूचना मिली।
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जांच के दौरान सीट के नीचे मिले बैग
टीम ने प्लेटफ़ॉर्म नंबर 1 पर ट्रेन के आने के तुरंत बाद पूरी तलाशी शुरू की। तलाशी में एक सीट के नीचे रखे तीन लावारिस कपड़े के बैग मिले। RPF वालों ने पास में बैठी कुछ महिला यात्रियों से पूछा, लेकिन किसी ने बैग नहीं लिया।
एक टीम ने जब इन बैगों को खोला तो जूट के बोरे में भरे 35 ज़िंदा कछुए मिले। ज़ब्त किए गए कछुओं को RPF पोस्ट ले जाया गया।
बाद में RPF ने फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट को बताया, जिसके बाद कछुओं को वाइल्डलाइफ़ प्रोटेक्शन कानूनों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए रेंज ऑफ़िसर, धनबाद को सौंप दिया गया।
अधिकारी तस्करी किए गए कछुओं के ओरिजिन और डेस्टिनेशन का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
सवालों के घेरे में रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था
बरामदगी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर 35 कछुए ट्रेन के महिला कोच तक पहुंचे कैसे? क्या प्लेटफॉर्म और ट्रेन में होने वाली नियमित जांच-पड़ताल पर्याप्त नहीं है?
प्लेटफॉर्म एंट्री प्वाइंट पर निगरानी पर सवाल
रेलवे स्टेशन पर बैग, पार्सल और संदिग्ध वस्तुओं की जांच के लिए सुरक्षा व्यवस्था मौजूद रहती है। इसके बावजूद
- तीन बड़े कपड़े के थैले
- जिनमें जूट के बोरे में कछुए भरे थे
बिना किसी रुकावट के ट्रेन के अंदर पहुँच जाना सुरक्षा एजेंसियों की लापरवाही की ओर इशारा करता है।
महिला कोच में लावारिस बैग कैसे रह गया?
महिला कोच में लगातार RPF और टिकट स्टाफ का आना-जाना होता है, फिर भी
- सीट के नीचे लावारिस बैग रखा होना
- किसी की नजर में न आना
चौंकाने वाली बात है। यह सवाल उठाता है कि क्या यात्रियों की सुरक्षा जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है?
तस्करों का बढ़ता नेटवर्क या सुरक्षा का ढीलापन?
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में ट्रेन के रास्ते वन्यजीव तस्करी के मामले बढ़े हैं। इससे यह भी संकेत मिलता है कि तस्कर सुरक्षा खामियों को भांपकर उसी के हिसाब से रणनीति बना रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों पर जवाबदेही तय करने की जरूरत
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि
- प्लेटफॉर्म निरीक्षण
- कोच चेकिंग
- बैगेज स्कैनिंग
को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
सवाल यह भी है कि जांच में चूक किस स्तर पर हुई, और आने वाले दिनों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कार्रवाई होगी?

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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