Ranchi News: झारखंड में एक तरफ कुड़मी समुदाय खुद को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर रहा है, तो दूसरी ओर आदिवासी समुदाय इसका जोरदार विरोध कर रहा है। इसी बीच अब राज्य में एक और वर्ग ओबीसी भी आरक्षण को लेकर मैदान में उतर आया है।
27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई
ओबीसी समुदाय ने झारखंड में 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई छेड़ने की घोषणा की है। इसी कड़ी में रांची में समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ओबीसी समाज के सभी संगठन अब एक मंच पर आकर सरकार से आरक्षण के हक की निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।
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प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए सूरज कुमार साहू ने कहा कि जब भी देश में आरक्षण की नींव रखी गई, तब यह तय किया गया कि जो समाज शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा है, उसे आगे बढ़ाने का अवसर दिया जाएगा।लेकिन झारखंड में स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। उन्होंने कहा, राज्य में अनुसूचित जनजाति को 26 प्रतिशत और अनुसूचित जाति को 12 प्रतिशत आरक्षण मिला है। लेकिन ओबीसी समाज को सिर्फ 14 प्रतिशत ही आरक्षण दिया गया है, जबकि देश में ओबीसी को कम से कम 27 प्रतिशत देने का प्रावधान है।
“जब झारखंड में ओबीसी की आबादी 54 प्रतिशत है, तो…”
सूरज साहू ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह मानक तय किया है कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। ऐसे में यदि 7 प्रतिशत एससी और 12 प्रतिशत एसटी को दिया जाता है, तो बाकी 27 प्रतिशत ओबीसी को मिलना चाहिए।उन्होंने सवाल उठाया, जब झारखंड में ओबीसी की आबादी 54 प्रतिशत है, तो हमें सिर्फ 14 प्रतिशत ही क्यों दिया गया?
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क्या झारखंड में गरीब ओबीसी नहीं हैं? उन्होंने आगे कहा कि इस असमानता की वजह से ओबीसी समुदाय के विद्यार्थियों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ रहा है। साहू ने उदाहरण देते हुए बताया, JPSC की प्रारंभिक परीक्षा में 200 प्रश्न होते हैं, हर प्रश्न 2 अंकों का होता है। ओबीसी समाज का छात्र 130 अंक लाकर भी चयनित नहीं हो पा रहा है। हाल ही में रेलवे की परीक्षा में ओबीसी का कटऑफ 70 प्रतिशत तक गया। ऐसे हालात में हमारे बच्चे बीडीओ या सीओ बनने का सपना कैसे देखे?
“जैसे अंग्रेजों ने हिंदू और मुस्लिम को बांट दिया था, वैसे ही…”
उन्होंने आगे कहा कि जैसे अंग्रेजों ने हिंदू और मुस्लिम को बांट दिया था, वैसे ही आज ओबीसी समाज को हाशिए पर धकेला जा रहा है।जब हमारी आबादी सबसे अधिक है, तो हमारा आरक्षण इतना कम क्यों? क्या ओबीसी समाज सरकार से अपना हक मांगने के लिए भीख मांगेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहे तो जो समाज वास्तव में पिछड़ा है, उसे आरक्षण का पूरा लाभ दे सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ओबीसी समुदाय को उनका संवैधानिक हक 27 प्रतिशत आरक्षण तुरंत दिया जाए। नहीं तो बहुत जल्द हमलोग एक मंच में आ कर आवाज बुलंद करेंगे।












