Jharkhand High Court News: झारखंड में JPSC की परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को लेकर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के जरिए विभिन्न विभागों में चयनित अधिकारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत संबंधित परीक्षाओं और नियुक्तियों को प्रभावित किया गया था। कोर्ट के इस आदेश से याचिकाकर्ताओं समेत सरकार के फैसले से प्रभावित अन्य नवनियुक्त अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है।
11वीं से 13वीं JPSC के चयनित अफसरों ने दाखिल की याचिका
यह मामला झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में सुना गया। सरकार के फैसले से प्रभावित अधिकारियों ने नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
याचिका दाखिल करने वालों में सुभाष मुर्मू, आशीष अक्षत, रवि कुमार हांसदा और आकांक्षा मिंज शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स, अर्पण मिश्रा और अंकित विशाल ने पक्ष रखा।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की अंतिम सुनवाई में जो भी आदेश पारित होगा, उसका असर संबंधित नियुक्तियों पर पड़ेगा। कोर्ट ने सरकार के आदेश पर फिलहाल रोक लगाते हुए मामले में प्रभावित नवनियुक्त अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने राज्य सरकार को भी इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी।
18 अगस्त को सरकार ने लिया था बड़ा फैसला
दरअसल, राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर उन परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिनमें परीक्षा एजेंसी TDPL की भूमिका रही थी। सरकार ने वर्ष 2014 से आयोजित नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की बात भी कही थी।
इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से संबंधित अधिसूचना जारी की गई। इसमें 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का उल्लेख किया गया था।
सरकार के इस फैसले का सीधा असर कई ऐसी नियुक्तियों पर पड़ा, जिनके जरिए अभ्यर्थी विभिन्न सरकारी विभागों में चयनित होकर अधिकारी बने थे। अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद इन नवनियुक्त अधिकारियों को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, नियुक्तियों का अंतिम भविष्य हाईकोर्ट में होने वाली आगे की सुनवाई और अंतिम आदेश पर निर्भर करेगा।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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