JPSC परीक्षा मामले में CID ने जांच को तेज कर दिया है। इस मामले में गड़बड़ी की जांच कर रही एजेंसी ने ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून को गिरफ्तार कर लिया है। ऋतिक को जमशेदपुर के सुंदरनगर-मानगो क्षेत्र से, जबकि पंकज को रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तारी के बाद दोनों को रांची ले जाया गया और उन्हें CID की विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
जांच में ऋतिक और पंकज के संबंध शिवांगन की पाठशाला के संचालक संजीत कुमार से जोड़ा जा रहा है। संजीत कुमार को पहले ही JPSC मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
अब CID यह समझने में जुटी है कि ऋतिक और पंकज का संजीत से कैसा संपर्क रहा है और तीनों की भूमिका क्या रही है।
जांच के दौरान कई नए नाम सामने आ सकते हैं। CID की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ सकता है। एजेंसी आरोपियों के बीच संपर्क, अभ्यर्थियों से जुड़े लोग और परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जांच कर रही है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इन आरोपियों के जरिए किसी बड़े नेटवर्क तक पहुंच बनाई जा सकती है। हालांकि, अदालत के फैसले से पहले किसी आरोपी को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
2026 में CID जांच ने पकड़ी रफ्तार
JPSC और JSSC-CGL परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों में 2026 के दौरान CID की कार्रवाई लगातार तेज हुई। जांच में एक के बाद एक गिरफ्तारियां हुईं और कथित परीक्षा नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग लोगों से पूछताछ की गई। जुलाई से सितंबर 2026 तक की प्रमुख कार्रवाई इस प्रकार है।
22 जुलाई 2026: अभय कुमार तिवारी की गिरफ्तारी
CID ने 22 जुलाई 2026 को अभय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया। उस समय वह गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर तैनात था। जांच में उसका संबंध TSR Data Processing Ltd. (TDPL) से भी सामने आया, जो परीक्षा संचालन से जुड़े कामों में शामिल थी।
अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद CID ने कथित परीक्षा नेटवर्क, अभ्यर्थियों और आर्थिक लेन-देन से जुड़े पहलुओं की जांच आगे बढ़ाई।
10 अगस्त 2026: पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते गिरफ्तार
10 अगस्त 2026 को CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांगते को 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया।
जांच में उनके कार्यकाल के दौरान TDPL को परीक्षा संचालन से जुड़ी जिम्मेदारी दिए जाने से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की गई। इस कार्रवाई के बाद जांच का दायरा परीक्षा संचालन से जुड़े प्रशासनिक और संस्थागत पहलुओं तक पहुंचा।
18 अगस्त 2026: अभय तिवारी की पत्नी और भाई गिरफ्तार
CID ने 18 अगस्त 2026 को अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों JSSC-CGL परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों में शामिल थे। CID ने दोनों की गिरफ्तारी को चल रही जांच का हिस्सा बताया। इसी दौरान परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं को लेकर JSSC कार्यालय के अधिकारियों से भी पूछताछ की गई।
27-28 अगस्त 2026: चार सफल अभ्यर्थी गिरफ्तार
अगस्त के अंतिम सप्ताह में CID ने JSSC-CGL मामले में चार सफल अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया।
इनमें धनबाद के दीपक कुमार, विजय कुमार तिवारी और आनंद कुमार सिंह तथा बोकारो में रहने वाले उमेश कुमार राय के नाम सामने आए।
CID की जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना था कि इन अभ्यर्थियों को कथित तौर पर परीक्षा में अनुचित लाभ कैसे मिला और उनके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।
29-31 अगस्त 2026: जांच पहुंची गिरिडीह
इसके बाद CID की कार्रवाई गिरिडीह तक पहुंची। 29 अगस्त के आसपास समीर उर्फ शालू से पूछताछ और हिरासत की जानकारी सामने आई। इसके बाद 31 अगस्त 2026 को समीर कुमार की JSSC-CGL मामले में गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।
इस कार्रवाई के साथ जांच एजेंसी ने कथित बिचौलियों और सफल अभ्यर्थियों के बीच संपर्कों की भी पड़ताल तेज की।
सितंबर 2026: बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों से पूछताछ
सितंबर के शुरुआती दिनों में CID की SIT ने JSSC-CGL मामले में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों से पूछताछ की।
रिपोर्टों के अनुसार, जांच टीम ने करीब 390 अभ्यर्थियों से पूछताछ की थी, जबकि लगभग 40 सफल अभ्यर्थियों से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच की जा रही थी।
इसी दौरान CID की कार्रवाई देवघर और कोडरमा तक पहुंची। देवघर से सुधाकर यादव नामक संदिग्ध को पूछताछ के लिए रांची लाए जाने की जानकारी सामने आई।
11 सितंबर 2026: कोडरमा में CID की छापेमारी
11 सितंबर 2026 को CID की टीम ने कोडरमा के डोमचांच सहित कुछ इलाकों में कार्रवाई की।
जांच टीम राजेश प्रसाद यादव और संदीप कुमार को पूछताछ के लिए रांची लेकर आई। शुरुआती कार्रवाई के दौरान दोनों से पूछताछ की गई और उनके कथित संपर्कों की जानकारी जुटाई गई।
15 सितंबर 2026: संजीत कुमार और दिलीप कुमार पासवान गिरफ्तार
15 सितंबर 2026 को CID ने JPSC और JSSC-CGL से जुड़े मामलों में दो अलग-अलग गिरफ्तारियां कीं।
JPSC मामले में शिवांगन की पाठशाला के संचालक संजीत कुमार को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, संजीत कुमार के कथित संपर्कों और परीक्षा में अनियमितता से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
इसी दिन JSSC-CGL मामले में बिहार निवासी दिलीप कुमार पासवान को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों को रांची लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
15 सितंबर 2026: ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून की गिरफ्तारी
इसी JPSC जांच में CID ने ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून को भी गिरफ्तार किया।
CID के अनुसार, ऋतिक रौशन को जमशेदपुर के सुंदरनगर-मानगो इलाके से, जबकि पंकज प्रसून को रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
जांच एजेंसी दोनों की कड़ी शिवांगन की पाठशाला के संचालक संजीत कुमार से जोड़कर देख रही है। संजीत कुमार की गिरफ्तारी के बाद CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून का उनसे किस तरह का संपर्क था और कथित परीक्षा गड़बड़ी में उनकी भूमिका क्या रही।
यह कार्रवाई JPSC मामले में जांच के उस पहलू को महत्वपूर्ण बनाती है, जिसमें कोचिंग सेंटर, अभ्यर्थियों और कथित मध्यस्थों के बीच संपर्क की पड़ताल की जा रही है।
16 सितंबर 2026: कोडरमा से राजेश यादव और संदीप कुमार गिरफ्तार
इसके बाद 16 सितंबर 2026 को CID ने कोडरमा से राजेश प्रसाद यादव और संदीप कुमार को गिरफ्तार किया।
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों से करीब तीन दिनों तक पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी दर्ज की गई। अब CID उनके कथित संपर्कों, अभ्यर्थियों से संबंध और JSSC-CGL मामले में उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
अब तक की जांच में क्या सामने आया?
2026 में हुई कार्रवाई को देखें तो CID की जांच का दायरा लगातार बढ़ा है। शुरुआती स्तर पर जहां परीक्षा प्रक्रिया और कथित पेपर लीक से जुड़े सवाल थे, वहीं अब जांच में अभ्यर्थियों, कोचिंग संस्थानों, कथित बिचौलियों, परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों और आर्थिक लेन-देन जैसे पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
JPSC मामले में संजीत कुमार, ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून की कड़ी की जांच, जबकि JSSC-CGL मामले में अभय तिवारी, उनके परिवार से जुड़े लोगों, सफल अभ्यर्थियों और कोडरमा-गिरिडीह समेत दूसरे स्थानों से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी ने जांच को कई दिशाओं में आगे बढ़ाया है।
हालांकि, जांच अभी जारी है। आरोपों की वास्तविकता और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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