Ranchi: झारखण्ड खेत एंव ग्रामीण मजदूर यूनियन (JKGMU) ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे VB-GRAM(G) मिशन का कड़ा विरोध करते हुए इसे मनरेगा को खत्म करने की साजिश करार दिया है। यूनियन ने 15 मई 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी मनरेगा मजदूर हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है।
यूनियन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा “विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” [VB-GRAM(G)] को लागू करने की अधिसूचना जारी की गई है, लेकिन यह योजना मनरेगा कानून की मूल भावना को कमजोर करती है। JKGMU का आरोप है कि यह देश की एकमात्र मांग-आधारित रोजगार गारंटी योजना को समाप्त करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
यूनियन ने कहा कि केंद्र सरकार 125 दिनों के रोजगार का दावा कर रही है, जबकि मौजूदा समय में औसतन 55 दिनों का भी काम मजदूरों को नहीं मिल पा रहा है। फेसियल रिकॉग्निशन और डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर जैसी तकनीकों के कारण बड़ी संख्या में मजदूर जॉब कार्ड और भुगतान व्यवस्था से बाहर हो रहे हैं। कई राज्यों में मजदूरी भुगतान एक वर्ष से अधिक समय से लंबित है।
JKGMU ने यह भी आरोप लगाया कि नई व्यवस्था के तहत दो महीने तक काम बंद रखने का प्रावधान कृषि मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत को कमजोर करने की कोशिश है। यूनियन ने केंद्र सरकार पर संघीय ढांचे को कमजोर करने का भी आरोप लगाया। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि केंद्र सरकार ने राज्यों पर 40 प्रतिशत वित्तीय हिस्सेदारी का बोझ डाल दिया है, जबकि कई राज्य पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
यूनियन ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का उदाहरण देते हुए दावा किया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद रोजगार के अवसरों में भारी गिरावट आई है। LibTech India के मनरेगा ट्रैकर के हवाले से कहा गया कि आंध्र प्रदेश में मानव-दिवस कार्य में 23.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं 100 दिनों का रोजगार पूरा करने वाले परिवारों की संख्या में 57.6 प्रतिशत की कमी आई है।
प्रेस विज्ञप्ति में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि वर्ष 2024 में खेती से जुड़े 10,546 लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें 5,913 कृषि मजदूर शामिल थे। यूनियन का कहना है कि मनरेगा को कमजोर करने से ग्रामीण और कृषि मजदूरों की स्थिति और खराब होगी।
JKGMU ने केंद्र सरकार से VB-GRAM(G) योजना को वापस लेने, मजबूत मनरेगा लागू करने, कम से कम 200 दिनों का रोजगार और 700 रुपये न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही फेसियल रिकॉग्निशन जैसी “बहिष्कारी तकनीकों” को हटाने और ग्राम सभाओं को मनरेगा क्रियान्वयन में प्रमुख भूमिका देने की मांग की गई है।
यूनियन के नेता वीरेन्द्र कुमार ने कृषि एवं ग्रामीण मजदूरों, यूनियनों और संगठनों से 15 मई की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होने की अपील की है।







