Jharkhand News: रांची में भाकपा माओवादी संगठन द्वारा मनाए जा रहे प्रतिरोध सप्ताह के दौरान एक बार फिर नक्सलियों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। जहां एक ओर झारखंड पुलिस और सुरक्षा बल पूरे राज्य में हाई अलर्ट पर हैं, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में शुक्रवार शाम आईईडी ब्लास्ट की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जराईकेला थाना क्षेत्र के सामठा के बाबूडेरा इलाके में नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए विस्फोट किया, जिसमें सीआरपीएफ 60 बटालियन के इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्रा घायल हो गए। इसके अलावा, नक्सलियों ने एक अन्य स्थान पर पुलिया को भी उड़ा दिया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। वहीं घायल जवान का इलाज चल रहा है।
घात लगाकर किया गया हमला
जानकारी के अनुसार, जिला पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य बलों की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान में जुटी थी, तभी घात लगाए नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट कर दिया। घायल जवान को तत्काल अस्पताल भेजा गया। पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेनु ने बताया कि पुलिस का अभियान जारी है और इलाके में नक्सलियों की तलाश की जा रही है।
आईजी ऑपरेशन का अलर्ट पहले ही जारी था
प्रतिरोध सप्ताह शुरू होने से पहले ही झारखंड पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान आईजी ऑपरेशन माइकल एस. राज ने बताया था कि भाकपा माओवादी संगठन ने 8 से 14 अक्टूबर तक प्रतिरोध सप्ताह और 15 अक्टूबर को झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बंदी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा था कि इस अवधि में किसी भी संभावित हमले को रोकने के लिए पूरे राज्य में सुरक्षा को सख्त किया गया है और बलों को पूरी सतर्कता के साथ अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
आईजी ने यह भी बताया था कि हाल के महीनों में नक्सल विरोधी अभियानों में 32 नक्सली मारे गए हैं और वर्तमान में झारखंड में करीब 80 सक्रिय माओवादी हैं, जिनमें से 65 के आसपास सारंडा क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने दावा किया था कि नक्सलियों की ताकत अब काफी हद तक कमजोर पड़ चुकी है।
फिलहाल, प्रतिरोध सप्ताह के बीच सारंडा में हुआ यह ब्लास्ट नक्सलियों की बचे-खुचे नेटवर्क की सक्रियता को दर्शाता है। हालांकि पुलिस मुख्यालय का कहना है कि बंदी और प्रतिरोध सप्ताह का राज्य में कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं, इस घटना को लेकर अब तक नक्सलियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
वहीं आपको बता दे कि एक करोड़ के ईनामी नक्सली मिसिर बेसरा अपने दस्ते के साथ चाईबासा के सारंडा चंगुल में वांछित है। लंबे समय से झारखंड पुलिस, झारखंड जगुआर उनकी तलाश के लिए चाईबासा के जंगलों में सर्च अभियान चला रही है। लेकिन वो लंबे समय में सुरक्षा बल के पकड़ से बाहर हैं। इसके साथ ही सारंडा जंगल के बारे में यह बताया जाता है कि यह जंगल नक्सलियों द्वारा बारूदी जाल से बिछा हुआ है, जहां जान किसी के लिए खतरे से खाली नहीं है। कई बार जंगल में आम आदमी से लेकर पशु और जवान आइडी ब्लास्ट से घायल हुए है। फिलहाल झारखंड की बात की जाए तो बुध पहाड़ जिसे नक्सलियों का अभेद किला बताया जा रहा था उसे झारखंड के जवान ने नक्सलियों से मुक्त कर दिया है। लेकिन चाईबासा का सारंडा जंगल नक्सलियों ले काफी कठिन माना जाता है।












