New Year 2026: झारखंड की गोद में छिपे प्राकृतिक रहस्यों की जब बात होती है, तो अक्सर नेतरहाट या हुंडरू फॉल का नाम जुबां पर आता है। लेकिन हाल के वर्षों में एक ऐसी जगह उभरी है जिसने अपनी खूबसूरती से गोवा के ‘बागा’ और ‘कलंगुट’ बीच की याद दिला दी है। वह जगह है खूंटी जिले का ‘पांडापुड़िंग’।
पांडापुड़िंग को ‘झारखंड का गोवा’ कहना महज एक मुहावरा नहीं, बल्कि यहाँ की सुनहरी रेत, नीले पानी और शांत लहरों का एक जीवंत अनुभव है।
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New Year 2026: पांडापुड़िंग: प्रकृति का एक अनूठा कैनवास
पांडापुड़िग खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड में स्थित है। तोरपा से फटका पंचायत के लोहाजिमी गांव में झारखंड का मिनी गोवा बसा हुआ है। राजधानी रांची से इसकी दूरी लगभग 80-85 किलोमीटर पड़ेगी।
यह मूल रूप से तजना नदी के किनारे बसा एक ऐसा तट है, जहाँ नदी की धारा किसी शांत समुद्र की तरह व्यवहार करती है। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘सफेद रेतीला तट’ है। जब सूरज की किरणें तजना नदी के पानी और उस सफेद रेत पर पड़ती हैं, तो एक ऐसा दृश्य निर्मित होता है जिसे देखकर भ्रम हो सकता है कि आप किसी समुद्री तट पर खड़े हैं।
New Year 2026: क्यों कहा जाता है इसे ‘झारखंड का गोवा’?

किसी भी जगह को गोवा से तुलना करने के पीछे तीन मुख्य कारण होते हैं: रेत, पानी और सुकून। पांडापुड़िग में ये तीनों प्रचुर मात्रा में हैं।
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सुनहरी और सफेद रेत: यहाँ नदी के किनारे बिछी रेत की चादर इतनी महीन और साफ है कि पर्यटक यहाँ घंटों नंगे पैर टहल सकते हैं। गोवा के बीच की तरह यहाँ भी आप रेत के घरौंदे बना सकते हैं।
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उथला और साफ पानी: तजना नदी का पानी यहाँ काफी उथला है, जिससे यह बच्चों और परिवारों के लिए सुरक्षित ‘बीच’ जैसा अनुभव देता है। पानी इतना पारदर्शी है कि तलहटी के पत्थर साफ नजर आते हैं।
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पिकनिक और सनसेट: यहाँ का सूर्यास्त (Sunset) किसी जादुई अहसास से कम नहीं। डूबते सूरज की लालिमा जब नदी के विस्तार पर बिखरती है, तो वह दृश्य हुबहू गोवा के अंजुना बीच की याद दिलाता है।
New Year 2026: पांडापुड़िग की खास विशेषताएं
1. शांति और एकांत (Serenity): गोवा में जहाँ शोर और भीड़भाड़ है, पांडापुड़िग अभी भी व्यावसायिकता से दूर है। यहाँ आप पक्षियों की चहचहाहट और पानी के कल-कल संगीत के बीच खुद को खोज सकते हैं।
2. फोटोग्राफी का स्वर्ग: इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के दौर में पांडापुड़िग युवाओं की पहली पसंद बन गया है। यहाँ के ‘रॉक फॉर्मेशन्स’ और नदी के बीच में निकले पत्थर फोटो के लिए बेहतरीन बैकग्राउंड देते हैं।
3. स्थानीय संस्कृति का जुड़ाव: पांडापुड़िग केवल एक पिकनिक स्पॉट नहीं है, यह आदिवासी संस्कृति के करीब जाने का जरिया भी है। रास्ते में पड़ने वाले छोटे गाँव और वहाँ की सादगी आपकी यात्रा को और भी समृद्ध बनाती है।
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New Year 2026: पांडापुड़िग कैसे पहुँचें? (Travel Guide)

खूंटी मुख्यालय से लगभग 15-20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस स्थल तक पहुँचना अब काफी आसान हो गया है:
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हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा बिरसा मुंडा एयरपोर्ट, रांची है। यहाँ से पांडापुड़िग की दूरी लगभग 60-65 किलोमीटर है। आप रांची से टैक्सी किराए पर ले सकते हैं।
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रेल मार्ग: रांची या हटिया रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक हैं। स्टेशन से आप बस या निजी वाहन के जरिए खूंटी और फिर मुरहू होते हुए पांडापुड़िग पहुँच सकते हैं।
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सड़क मार्ग: रांची-खूंटी रोड (NH-75) बेहतरीन स्थिति में है। खूंटी पहुँचने के बाद आपको मुरहू की ओर मुड़ना होगा, जहाँ से स्थानीय दिशा-निर्देशों या गूगल मैप की मदद से आप आसानी से नदी तट तक पहुँच सकते हैं।
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New Year 2026: पर्यटकों के लिए कुछ जरूरी सलाह
पांडापुड़िग अपनी कच्ची खूबसूरती के लिए जाना जाता है, इसलिए यहाँ जाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
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अपना सामान साथ रखें: चूंकि यह एक ग्रामीण इलाका है, यहाँ बड़े रेस्टोरेंट या कैफे नहीं हैं। पानी और नाश्ता साथ ले जाना बेहतर होगा।
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स्वच्छता का ध्यान: इसे ‘गोवा’ बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारी है। प्लास्टिक और कचरा नदी में न फेंकें।
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सुरक्षा: शाम ढलने से पहले मुख्य सड़क की ओर लौटना सुरक्षित माना जाता है।
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पांडापुड़िग झारखंड के पर्यटन मानचित्र पर उभरता हुआ एक बेशकीमती हीरा है। यह उन लोगों के लिए एक आदर्श जगह है जो समुद्र की कमी को पहाड़ों और नदियों के बीच महसूस करना चाहते हैं। अगर आप भी शहर की भागदौड़ से दूर, रेत पर बैठकर ढलते सूरज को देखना चाहते हैं, तो इस वीकेंड खूंटी के इस ‘मिनी गोवा’ का रुख जरूर करें।













