Nitish Kumar Rajya Sabha: बिहार की राजनीति में एक बार फिर ‘भूचाल’ आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। 24 नवंबर 2005 को पहली बार सत्ता संभालने वाले नीतीश कुमार, जो पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति के धुरी बने हुए थे, अब दिल्ली की ओर रुख करने की तैयारी में हैं।
नीतीश कुमार का सफर
नीतीश कुमार का कार्यकाल बिहार में बुनियादी ढांचे और सामाजिक सुधारों (जैसे शराबबंदी और महिला आरक्षण) के लिए जाना जाता है। इस दौरान उन्होंने कई बार पक्ष भी बदला, कभी NDA के साथ गए तो कभी महागठबंधन में शामिल हुए, लेकिन एक बात जो हमेशा स्थिर रही, वो थी उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी। हालांकि, अब उनके राज्यसभा जाने के फैसले को कई जानकार एक ‘युग का अंत’ मान रहे हैं।
Nitish Kumar Rajya Sabha: रोहिणी आचार्य का तीखा प्रहार: “अपनों से बेवफाई का फल है यह”
लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस सियासी घटनाक्रम पर सोशल मीडिया के जरिए नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला है।रोहिणी आचार्य ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है.. “अपनों के साथ बारम्बार बेवफाई करने वाले नीतीश कुमार जी.. खुद के गर्त में धकेले जाने और अपनी बदहाली के आप खुद जिम्मेदार हैं आपके साथ आज जो हो रहा आप उसके ही हक़दार हैं .. आज अवसरवादिता के शिखर पुरुष श्री नीतीश कुमार जी को जैसा निर्णय लेने के लिए भाजपा के द्वारा मजबूर किया गया , ये तो 28 जनवरी, 2024 को ही तय हो गया था , जब नीतीश कुमार जी ने गुलाटी मारने की अपने जगजाहिर कौशल की पुनरावृत्ति करते हुए महागठबंधन / इंडिया अलायन्स का साथ छोड़ा था .. कुर्सी से चिपके रहने की अपनी स्वभावतः मज़बूरी की वजह से ही आज नीतीश कुमार जी उस भाजपा के हाथों की कठपुतली बन चुके हैं , जो अपने सहयोगियों की राजनीतिक कब्र खोदने और उनको दफनाने के लिए ही जानी जाती है .. महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे जी का जो हश्र भाजपा ने किया, नीतीश कुमार जी उससे भी नहीं चेते और अपने पुराने समाजवादी साथियों के बार – बार आगाह करने के बावजूद खुद ही कब्र सरीखी भाजपा की गोद में जा बैठे .. अपने ही विनाश के लिए भाजपा के द्वारा जारी तुगलकी फरमान पर अपनी रजामंदी देने वाले नीतीश कुमार जी के बारे में अब दो बातें तो जाहिर एवं साबित होती हैं ” नीतीश कुमार जी की सोचने – समझने की शक्ति पूरी तरह से क्षीण हो चुकी है और नीतीश कुमार जी की कोई बहुत कमजोर नस भाजपा ने जरूर दबा रखी है”
जदयू के सीनियर लीडर K. C. Tyagi: “नीतीश युग का अंत कभी नहीं हो सकता”
विपक्ष के हमलों के बीच जेडीयू (JDU) के दिग्गज नेता के.सी. त्यागी ने नीतीश कुमार का बचाव किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि नीतीश युग का अंत नहीं हो सकता, नीतीश कुमार ने बिहार को नया स्वरूप दिया है। उनके काम कर्पूरी ठाकुर और चौधरी चरण सिंह की तरह हमेशा जीवित रहेंगे। त्यागी ने कहा कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो वहां बहस का स्तर ऊंचा होगा। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2001 में नीतीश कुमार को उनके उत्कृष्ट संसदीय प्रदर्शन के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद‘ के सम्मान से नवाजा जा चुका है।
नीतीश कुमार का यह फैसला बिहार की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव का संकेत है। क्या यह सक्रिय राजनीति से उनका ‘सम्मानजनक निकास’ है या फिर दिल्ली की राजनीति में किसी बड़ी भूमिका की शुरुआत? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।












