Khabar Mantra Desk: भारत सरकार ने बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और पोषण को लेकर ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि “पोषण भी पढ़ाई भी” पहल ने आंगनवाड़ी केंद्रों को सिर्फ पोषण का स्थान नहीं, बल्कि पहली पाठशाला में बदल दिया है, जहाँ खेल-आधारित शिक्षा के जरिए बच्चों का समग्र विकास हो रहा है।
मोदी सरकार की पहल: शिक्षा और पोषण एक साथ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी विकास यात्रा में बच्चों को केंद्र में रखा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) ने यह स्पष्ट किया कि मस्तिष्क का 85% विकास छह वर्ष की उम्र तक हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों में ईसीसीई (Early Childhood Care and Education) लागू किया है।
शोध से साबित: खेल-आधारित शिक्षा से IQ में वृद्धि
- CMC वेल्लोर के अध्ययन के अनुसार, व्यवस्थित ईसीसीई प्राप्त करने वाले बच्चों का IQ पाँच साल की उम्र तक 19 अंक तक बढ़ा।
- अंतरराष्ट्रीय शोध भी बताते हैं कि पाँच वर्ष से पहले ईसीसीई में शामिल बच्चों में 67% बेहतर सामाजिक और शैक्षणिक प्रदर्शन देखने को मिलता है।
- नोबेल पुरस्कार विजेता जेम्स हेकमैन के अनुसार, प्रारंभिक शिक्षा में निवेश से 13-18% तक रिटर्न मिलता है।
‘पोषण भी पढ़ाई भी’: कैसे बदल रही है आंगनवाड़ी
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को खेल-आधारित शिक्षा के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
- राष्ट्रीय पाठ्यक्रम आधारशिला तैयार की गई है, जो बच्चों के बौद्धिक ही नहीं, भावनात्मक और सामाजिक विकास पर भी जोर देती है।
- अब आंगनवाड़ी केंद्र सिर्फ पोषण का नहीं, बल्कि सीखने और खेलने का सुरक्षित माहौल बन गए हैं।
आधारशिला की 5+1 योजना
- दिन की शुरुआत 30 मिनट के मुक्त खेल से होती है।
- इसके बाद भाषा, मोटर स्किल, रचनात्मकता और सामाजिक गतिविधियाँ कराई जाती हैं।
- दोपहर में पौष्टिक भोजन और आराम के बाद, दिन का समापन बाहरी खेल व संवाद से किया जाता है।
नवचेतना: घर पर भी शिक्षा का प्रोत्साहन
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने नवचेतना पहल भी शुरू की है, जिसके जरिए माता-पिता को घर पर ही बच्चों के लिए खेल-आधारित, आयु-उपयुक्त गतिविधियाँ करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है।
अभिभावकों का बढ़ता विश्वास
जो परिवार पहले आंगनवाड़ी को केवल पोषण केंद्र मानते थे, अब उन्हें बच्चों की शिक्षा की पहली सीढ़ी मान रहे हैं।
नतीजा: भविष्य के लिए मजबूत नींव
यह पहल सुनिश्चित कर रही है कि भारत का हर बच्चा जन्म से ही मजबूत शुरुआत पाए। मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा—
“खेल कोई विलासिता नहीं है, बल्कि सीखने की नींव है। हर बच्चे को अवसर मिलना चाहिए ताकि वह जीवनभर सीख सके और आगे बढ़ सके।”












