Iran-Israel war: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान में फंसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार ने छात्रों की निकासी की तैयारी पूरी कर ली है। जानकारी के अनुसार, गुरुवार को भारतीय छात्रों का पहला जत्था ईरान से आर्मेनिया सीमा की ओर रवाना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी प्रशासन और भारतीय छात्रों के बीच समन्वय के बाद सुरक्षित निकासी के लिए दो रूट तय किए गए हैं—आर्मेनिया और अजरबैजान। इन दोनों रास्तों के जरिए छात्रों को ईरान से बाहर निकालने की योजना बनाई गई है। ईरान में पढ़ रहे अधिकांश भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं और उनमें बड़ी संख्या जम्मू-कश्मीर के छात्रों की है।
Iran-Israel war:छात्रों को दिए गए दो सुरक्षित रूट
ईरान में मौजूद भारतीय छात्रों को जो जानकारी साझा की गई है, उसके अनुसार तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज (TUMS), ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज (IUMS) और शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज (SBUMS) में पढ़ने वाले छात्रों को आर्मेनिया या अजरबैजान के रास्ते बाहर निकलने का विकल्प दिया गया है।
अधिकारियों और छात्र समूहों के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है ताकि जो छात्र निकलना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षित तरीके से तय एग्जिट प्वाइंट तक पहुंचाया जा सके। स्थानीय प्रशासन और छात्र संगठनों की मदद से छात्रों को सीमा तक सुरक्षित ले जाने की व्यवस्था की जा रही है।
Iran-Israel war: कई छात्रों ने फ्लाइट से लौटने का चुना रास्ता
कुछ छात्रों ने जमीनी मार्ग से निकलने के बजाय हवाई मार्ग से भारत लौटने का विकल्प चुना है। जानकारी के अनुसार, कई छात्रों ने 15 और 16 मार्च सहित आने वाले दिनों के लिए फ्लाईदुबई की फ्लाइट बुक कर ली है, ताकि नजदीकी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों के जरिए सीधे भारत पहुंच सकें।
वहीं शिराज यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में पढ़ रहे 86 भारतीय छात्रों के लिए स्थानीय प्रशासन ने अलग निकासी योजना सुझाई है। इस योजना के तहत छात्र शिराज से क़ोम होते हुए अजरबैजान की राजधानी बाकू पहुंच सकते हैं, जहां से वे भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़ सकेंगे।
Iran-Israel war:छात्रों में बढ़ रही चिंता
ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष मोहम्मद मोमिन खान के अनुसार, ईरान के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे भारतीय छात्र लगातार मदद की अपील कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गोलेस्तान, केरमान और इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में पढ़ने वाले छात्रों से लगातार फोन आ रहे हैं।
उनके मुताबिक, छात्रों को डर है कि मौजूदा हालात में ईरान का कोई भी हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, इसलिए वे जल्द से जल्द देश छोड़ना चाहते हैं।
Iran-Israel war:राजनीतिक प्रतिनिधियों से भी मिल रहा सहयोग
छात्र संगठनों ने बताया कि कई राजनीतिक प्रतिनिधि भी छात्रों की मदद के लिए सक्रिय हैं। ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी का आभार जताया है, जिन्होंने छात्रों की चिंताओं को अधिकारियों तक पहुंचाने और उनकी सुरक्षित वापसी के प्रयासों में सहयोग किया है।
Iran-Israel war: परिवारों की बढ़ी चिंता
ईरान से छात्रों की निकासी की तैयारी के बीच भारत में मौजूद उनके परिवार भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जैसे-जैसे अलग-अलग बैच देश छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं, परिवारों को सुरक्षित वापसी की उम्मीद है। छात्र संगठनों का कहना है कि आने वाले दिनों में और अधिक छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की जा सकती है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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