झारखंड में DGP की नियुक्ति को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में पिछले 10 दिनों से DGP की नियुक्ति न होने को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक अस्थिरता करार देते हुए ट्विटर पर टिप्पणी की कि झारखंड देश का पहला राज्य बन गया है जहां इतने दिनों तक DGP की नियुक्ति लंबित रही है।
इस पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए यह बेवजह विवाद खड़ा कर रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत में लंबित है और अदालत का जो भी फैसला होगा, राज्य सरकार उसे मानेगी। साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि केंद्र में भाजपा सरकार ने ही रिटायरमेंट के तुरंत बाद कई अधिकारियों की नियुक्ति की थी, जिसका उदाहरण आर. अस्थाना और प्रकाश सिंह हैं।
वहीं, भाजपा प्रवक्ता अजय शाह ने झारखंड सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि DGP की नियुक्ति UPSC की सिफारिशों के आधार पर होनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नियुक्त DGP को न तो गृह मंत्रालय से एक्सटेंशन मिला है और न ही नियुक्ति प्रक्रिया में UPSC का कोई पैनल शामिल था, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है।
झारखंड सरकार का कहना है कि उन्होंने सभी नियमों का पालन करते हुए कैबिनेट से मंजूरी लेकर DGP की नियुक्ति की है। अब देखना यह होगा कि यह विवाद अदालत और सियासत में क्या मोड़ लेता है।












