झारखंड के Hazaribagh जिले में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं कांग्रेस ने बीजेपी पर इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद आदित्य साहू ने रांची में प्रेसवार्ता करते हुए इस घटना को “निर्भया से भी ज्यादा जघन्य” बताया। उन्होंने कहा कि हजारीबाग के विष्णुगढ़ प्रखंड के कुसुंबा गांव में हुई यह घटना बेहद हृदयविदारक है। साहू के अनुसार, बच्ची के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई।
बीजेपी नेताओं की टीम घटना की जानकारी मिलने के बाद गांव पहुंची थी। आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि घटना के कई दिन बाद तक प्रशासन पीड़ित परिवार तक नहीं पहुंचा, जो सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मृतका के पिता को घर लौटने में भी प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं दी गई।
बीजेपी ने राज्य सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो 29 मार्च को हजारीबाग के सभी प्रखंडों में मशाल जुलूस निकाला जाएगा और 30 मार्च को जिले में बंद बुलाया जा सकता है। इसके साथ ही महिला मोर्चा द्वारा पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन की भी घोषणा की गई है।
साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे अन्य राज्यों में राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त हैं, लेकिन झारखंड की इस दर्दनाक घटना पर उन्होंने संवेदना तक व्यक्त नहीं की।
वहीं, इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि इतनी संवेदनशील घटना पर राजनीति करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दुष्कर्म जैसी घटनाएं समाज के लिए कलंक हैं और सभी दलों को मिलकर इसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार और प्रशासन इस मामले में पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाएगी। साथ ही बीजेपी को नसीहत देते हुए कहा गया कि वह राजनीति छोड़कर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी हो।
इस घटना ने एक बार फिर राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।












