नई दिल्ली: ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ अध्याय को लेकर उठे विवाद के बीच National Council of Educational Research and Training (NCERT) की नई सोशल साइंस किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। यह फैसला Supreme Court of India के चीफ जस्टिस Surya Kant की कड़ी आपत्ति के बाद सामने आया।
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित किताब की बिक्री फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
CJI की सख्त टिप्पणी: “न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं”
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा,
“दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोचा-समझा कदम लगता है। मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा।”
यह मामला सीनियर एडवोकेट Kapil Sibal ने उठाया था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है, जो चिंताजनक है।
बेंच में CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस Vipul M Pancholi शामिल थे।
किस किताब में जोड़ा गया ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर?
NCERT ने 23 फरवरी को नई टेक्स्टबुक Exploring Society: India and Beyond Part 2 जारी की।
इस किताब में ‘The Role of the Judiciary in Our Society’ टॉपिक के अंतर्गत न्यायपालिका में भ्रष्टाचार (Judicial Corruption) पर चर्चा जोड़ी गई है।
- किताब का पहला भाग जुलाई 2025 में जारी हुआ था।
- यह नई किताब शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्कूलों में लागू होनी है।
किताब में ‘Justice delayed is justice denied’ का उल्लेख करते हुए लंबित मामलों के आंकड़े भी दिए गए हैं:
- सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार से अधिक मामले लंबित
- हाईकोर्ट में करीब 40 लाख मामले
- जिला व अधीनस्थ अदालतों में लगभग 70 करोड़ मामले
सीनियर वकीलों की आपत्ति: “सिर्फ न्यायपालिका को निशाना क्यों?”
सुनवाई के दौरान सीनियर वकील Abhishek Manu Singhvi ने कहा कि किताब में बच्चों को ऐसे पढ़ाया जा रहा है मानो भ्रष्टाचार केवल न्यायपालिका में ही मौजूद है।
उन्होंने तर्क दिया कि:
- ब्यूरोक्रेसी और राजनीति जैसे अन्य संस्थानों पर एक शब्द भी नहीं है।
- इससे बच्चों के मन में न्यायपालिका के प्रति नकारात्मक धारणा बन सकती है।
कपिल सिब्बल ने कहा कि यह बार काउंसिल की गंभीर चिंता का विषय है।
“बेसिक स्ट्रक्चर के खिलाफ” – जस्टिस बागची
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि किताब की सामग्री संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) की संवैधानिक अखंडता के अनुरूप नहीं लगती।
CJI ने स्पष्ट किया कि उन्हें बार और बेंच दोनों से लगातार प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं और सिस्टम के सभी स्टेकहोल्डर्स चिंतित हैं। उन्होंने कहा,
“कानून अपना काम करेगा। मैं इस मामले को खुद देखूंगा।”













