Prayagraj के झूंसी थाने में शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोप में POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, स्पेशल POCSO कोर्ट के निर्देश के बाद 21 फरवरी 2026 को यह मामला दर्ज किया गया। FIR में उनके शिष्य मुकुंदानंद समेत 2-3 अज्ञात व्यक्तियों का भी नाम शामिल है।
किसकी याचिका पर हुई कार्रवाई?
यह मामला जगद्गुरु Jagadguru Rambhadracharya के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की शिकायत के बाद सामने आया।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद दायर किया था। उन्होंने अदालत में दो नाबालिग बच्चों को पेश कर गंभीर आरोप लगाए। कोर्ट ने बच्चों के बयान कैमरे के सामने दर्ज किए और 13 फरवरी को आदेश सुरक्षित रखने के बाद FIR दर्ज करने का निर्देश दिया।
FIR में क्या-क्या आरोप लगाए गए?
शिकायत में लगाए गए मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:
- माघ मेला के दौरान आयोजित शिविर में दो नाबालिग शिष्यों ने कथित शोषण की जानकारी दी।
- बच्चों ने आरोप लगाया कि उन्हें करीब एक वर्ष तक शारीरिक शोषण का शिकार बनाया गया।
- महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान भी कथित घटनाएं होने का दावा किया गया।
- 24 जनवरी को झूंसी थाने में शिकायत देने के बाद भी कार्रवाई न होने का आरोप लगाया गया।
- 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज हुई।
आरोपी पक्ष की प्रतिक्रिया
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि सच्चाई जांच में सामने आएगी और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया
पुलिस का कहना है कि मामला POCSO एक्ट के तहत दर्ज किया गया है और जांच प्रक्रिया जारी है। बच्चों की पहचान और सुरक्षा को गोपनीय रखा जा रहा है।
यह मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया में है और अंतिम सत्य जांच और अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।
प्रयागराज में दर्ज यह मामला धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। कोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुई FIR के बाद अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगामी कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।
Disclaimer: मामला न्यायालय में विचाराधीन है। सभी आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक निर्णय के बाद ही होगी।













