CAS सिस्टम लागू होते ही बदली बाजार की चाल, सेंसेक्स और निफ्टी में दिखा बड़ा अंतर
Share Market Today 4 august 2026: 4 अगस्त 2026 को सेंसेक्स 200 अंक चढ़कर 78,850 पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 150 अंक गिरा। जानिए CAS सिस्टम क्या है, NSE ने क्या नया बदलाव किया है और क्यों दिखा दोनों इंडेक्स में अलग-अलग ट्रेंड।
Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार (4 अगस्त) को कारोबार की शुरुआत मिलेजुले रुख के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 200 अंक की बढ़त के साथ 78,850 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 150 अंक फिसलकर 24,600 के आसपास कारोबार करता दिखा।
एक ही समय में दोनों प्रमुख इंडेक्स की अलग-अलग चाल ने निवेशकों को हैरान कर दिया। हालांकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने स्पष्ट किया कि यह किसी तकनीकी खराबी का मामला नहीं है, बल्कि हाल ही में लागू किए गए नए Closing Auction Session (CAS) फ्रेमवर्क का प्रभाव है।
4 अगस्त: बाजार का हाल
सेंसेक्स: 78,850 (करीब 200 अंक की बढ़त)
निफ्टी: 24,600 (करीब 150 अंक की गिरावट)
3 अगस्त को बाजार मजबूत बंद हुआ था
सेंसेक्स: 78,639 (+544 अंक | +0.70%)
निफ्टी: 24,774 (+390 अंक | +1.60%)
मिडकैप 100: 18,302 (+1.08%)
स्मॉलकैप 100: 97,574 (+1.17%)
सेंसेक्स और निफ्टी में अलग-अलग ट्रेंड क्यों दिखा?
नए CAS सिस्टम का असर
हाल ही में NSE ने डेरिवेटिव (F&O) शेयरों के लिए नया Closing Auction Session (CAS) फ्रेमवर्क लागू किया है। इसके कारण कुछ शेयरों के स्पॉट और फ्यूचर्स प्राइस में अंतर देखने को मिला, जिसका असर निफ्टी और सेंसेक्स की गणना पर पड़ा।
NSE ने दी सफाई
NSE ने स्पष्ट किया कि यह कोई तकनीकी गड़बड़ी (Technical Glitch) नहीं है। इंडेक्स में दिखा अंतर नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम के कारण आया है।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, वैश्विक तनाव में कमी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार खरीदारी ने सेंसेक्स को मजबूती दी।
वैश्विक बाजारों का मिला-जुला असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों और कॉर्पोरेट नतीजों के बाद वैश्विक बाजारों में सतर्क माहौल बना हुआ है। इसका असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिला।
CAS (Closing Auction Session) शेयर बाजार का एक विशेष ट्रेडिंग सेशन है, जिसमें बाजार बंद होने से पहले खरीद और बिक्री के ऑर्डर इकट्ठा किए जाते हैं। इसके आधार पर किसी शेयर का आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस (Closing Price) तय किया जाता है।
इसका उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है, ताकि बाजार बंद होने के समय किसी तरह की कृत्रिम खरीद-बिक्री या कीमतों में हेरफेर की संभावना कम हो।
CAS सिस्टम में नया बदलाव क्या हुआ है?
NSE ने हाल ही में F&O (Derivatives) शेयरों के लिए नया Closing Auction Session (CAS) फ्रेमवर्क लागू किया है।
पहले इन शेयरों की क्लोजिंग कीमत सामान्य ट्रेडिंग के अंतिम भाव के आधार पर तय होती थी, लेकिन अब क्लोजिंग ऑक्शन के जरिए अंतिम कीमत तय होगी। इससे स्पॉट और फ्यूचर्स बाजार के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और क्लोजिंग प्राइस अधिक विश्वसनीय होगी।
यही वजह है कि सिस्टम लागू होने के शुरुआती दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी की चाल में अंतर देखने को मिल रहा है। NSE ने साफ किया है कि यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि किसी तकनीकी खराबी का संकेत।
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी
इंडेक्स
स्तर
बदलाव
कोस्पी (दक्षिण कोरिया)
6,198
-0.83%
निक्केई (जापान)
63,333
-0.66%
हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग)
25,919
-0.30%
अमेरिकी बाजारों में रही तेजी
इंडेक्स
स्तर
बदलाव
डाउ जोन्स
53,178
+1.32%
नैस्डैक
25,914
+2.13%
S&P 500
7,601
+1.48%
विदेशी निवेशकों ने बढ़ाया भरोसा
पिछले सात कारोबारी दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 7,805 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की है।
कैटेगरी
पिछले 7 दिन
DII
+2,966 करोड़
FII/FPI
+7,805 करोड़
हालांकि पिछले 30 दिनों के आंकड़ों में FIIs अभी भी नेट सेलर बने हुए हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सेंसेक्स और निफ्टी के बीच दिख रहा अंतर फिलहाल CAS सिस्टम में हुए बदलाव का असर है। इसे किसी तकनीकी खराबी या बाजार में बड़ी गड़बड़ी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल, विदेशी निवेश और वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
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