SIR in Jharkhand: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तैयारी तेज है, और इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर 2003–2004 की मतदाता सूची से मिलान क्यों किया जा रहा है?
लोगों में नाम कटने, दोबारा जुड़वाने, पते बदलने, Online Form भरने और नागरिकता दस्तावेजों को लेकर भ्रम फैल रहा है।
इसी मुद्दे पर जानें SIR से जुड़ी हर जरूरी बात और चुनाव आयोग की ओर से जारी निर्देश।
2003–2004 की मतदाता सूची का मिलान क्यों जरूरी?
भारतीय नागरिकता कानून के अनुसार–
- यदि कोई व्यक्ति 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में पैदा हुआ है, तो उसे भारत का नागरिक माना जाता है।
- यदि उस जन्म वर्ष में 18 वर्ष जोड़े जाएँ, तो नागरिक के लिए मतदान का पहला पात्रता वर्ष 2002–2004 की अवधि आती है।
इसीलिए 2003–04 की मतदाता सूची को एक मानक नागरिकता रिकॉर्ड माना जा रहा है।
जिनका नाम इस सूची में दर्ज है, उनकी नागरिकता को लेकर अतिरिक्त जांच की आवश्यकता नहीं मानी जा रही है।
इसलिए SIR में पुरानी (2003) मतदाता सूची और वर्तमान मतदाता सूची का मिलान किया जा रहा है।
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झारखंड में SIR क्यों अहम?
झारखंड उन राज्यों में शामिल है जहाँ आगामी चरण में SIR प्रक्रिया लागू होने की संभावना है।
इधर जिला प्रशासन पूरी तेजी से फैमिली ट्री मैपिंग, पुराने रिकॉर्ड का सत्यापन और मतदाता सूचियों को अपडेट करने में लगा है।
- पंचायत स्तर पर शिविर
- शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान
- दस्तावेज अपडेट कराने के लिए विशेष कैंप
मतदाताओं को कहा गया है कि वे अपने नागरिकता और निवास से जुड़े दस्तावेज समय रहते तैयार रखें।
SIR में किन दस्तावेजों की जरूरत?
चुनाव आयोग ने 13 प्रकार के दस्तावेज सूचीबद्ध किए हैं (यह सूची केवल संदर्भ के लिए है):
- आधार (सहायक दस्तावेज – नागरिकता प्रमाण नहीं)
- PAN
- ड्राइविंग लाइसेंस
- बैंक पासबुक
- राशन कार्ड
- जन्म प्रमाणपत्र
- स्कूल/कॉलेज प्रमाणपत्र
- पासपोर्ट आदि
अपने और माता-पिता दोनों के दस्तावेज स्व-प्रमाणित करने होंगे।
झारखंड में क्या चल रहा है?
- वर्तमान मतदाता सूची की 2003 सूची से मैपिंग
- फैमिली ट्री (Family Tree) तैयार किया जा रहा है
- बीएलओ घर-घर सत्यापन कर रहे हैं
- आधार नंबर, परिवार के EPIC नंबर और संबंध की जानकारी इकट्ठा की जा रही है
राज्य में मतदाताओं से कहा गया है कि वे अपने पहचान पत्र, निवास प्रमाण, जन्म रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज समय पर अपडेट कर लें।
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महत्वपूर्ण: आधार कार्ड नागरिकता प्रमाण नहीं
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है:
आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
लेकिन इसे सहायक दस्तावेज के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
ऑनलाइन आवेदन कैसे भरें? (NVSP / Voter Helpline App)
झारखंड के बाहर रहने वाले मतदाताओं के लिए यह सबसे आसान तरीका है:
फॉर्म-6 (नया नाम जोड़ने हेतु) या फ़ॉर्म-8 (पता/जानकारी अपडेट) ऑनलाइन भरें:
NVSP Portal – https://voters.eci.gov.in
NVSP – https://nvsp.in
Voter Helpline App
आवेदन जमा करते ही आपको Reference Number मिलता है, जिससे आप आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं।
बीएलओ का रोल: झारखंड में क्यों बढ़ गया है अहम?
- घर-घर सत्यापन
- दस्तावेजों का मिलान
- नए और पुराने मतदाताओं की फैमिली मैपिंग
- किराये के मकान या स्थानांतरण वाले मामलों में भौतिक सत्यापन
यदि बीएलओ नहीं आ रहे हैं, आपको थाने/ब्लॉक कार्यालय में संपर्क करना चाहिए या ऑनलाइन फॉर्म भरने पर वे स्वयं सत्यापन के लिए आते हैं।
किरायेदार कैसे जोड़ें अपना नाम?
मकान मालिक की अनुमति जरूरी नहीं।
सिर्फ ये पर्याप्त है:
- किराया रसीद
- बिजली बिल
- पड़ोसियों का सत्यापन
- किरायानामा (यदि हो)
17+ उम्र वाले युवा क्या करें?
17 वर्ष पर प्री-रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है।
18 वर्ष पूरा होते ही नाम स्वतः मतदाता सूची में जुड़ जाएगा।
झारखंड में SIR क्यों महत्वपूर्ण है?
- नागरिकता सत्यापन
- पुराने दस्तावेजों का मिलान
- 2003–2004 सूची को बेसलाइन मानना
- मतदाता सूचियों को साफ-सुथरा बनाना
- फर्जी या दोहरी प्रविष्टियों को हटाना
- पात्र मतदाताओं को जोड़ना
झारखंड में चुनाव आयोग की तैयारी दर्शाती है कि आने वाले महीनों में मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया राज्य में बड़े पैमाने पर लागू की जाएगी।











