Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में आदिवासी अधिकार, परिसीमन और बदलती जनसांख्यिकी के मुद्दे पर कांग्रेस, मिशनरी संस्थाओं और राज्य सरकार को घेरा है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आदिवासी समाज के साथ धोखा किया और उसे गुमराह करने के लिए मिशनरियों का इस्तेमाल किया।
मरांडी ने झारखंड आंदोलन का जिक्र करते हुए जयपाल सिंह मुंडा, कार्तिक उरांव और शिबू सोरेन के आंदोलनों का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आंदोलनों को दबाने और प्रभावित करने का काम किया। उन्होंने आदिवासी समाज से कांग्रेस और मिशनरियों के कथित प्रभाव से सावधान रहने की अपील की।
केंद्र सरकार में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं
परिसीमन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं। उन्होंने दावा किया कि इन अधिकारों से कोई छेड़छाड़ नहीं होने दी जाएगी।
मरांडी ने रांची में हुए आदिवासी महाजुटान को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रैली में लोगों को शामिल होने के लिए कथित तौर पर पत्र जारी किया गया और 100 से 500 रुपये तक जुर्माने की धमकी दी गई। इसके समर्थन में उन्होंने एक ऑडियो क्लिप सुनाने की बात कही। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संथाल परगना की बदलती डेमोग्राफी को गंभीर चिंता का विषय
उन्होंने झारखंड और खासकर संथाल परगना की बदलती डेमोग्राफी को गंभीर चिंता का विषय बताया। मरांडी ने 1951 और 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों का हवाला देते हुए आदिवासी आबादी के प्रतिशत में कमी और मुस्लिम आबादी में वृद्धि का मुद्दा उठाया। उन्होंने 2051 के संभावित आंकड़ों का भी अनुमान प्रस्तुत किया, हालांकि ये उनके द्वारा दिए गए प्रक्षेपण हैं।
भाजपा नेता ने पाकुड़ में आदिवासी जमीन पर कथित कब्जे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आदिवासी कल्याण समिति, पाकुड़ के एक पत्र का हवाला देते हुए रैयती जमीन पर अवैध कब्जे, फर्जी दानपत्र और निर्माण की शिकायतों का उल्लेख किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन मामलों की जांच और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। प्रेस वार्ता में अशोक बड़ाइक, रामकुमार पाहन, सनी टोप्पो और पिंकी खोया भी मौजूद रहे।

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