Dhanbad News/ Ram Murti Pathak: धनबाद कोयलांचल में इन दिनों चुनावी पारा सातवें आसमान पर है। जमीन के नीचे सुलग रही आग धनबाद की पहचान रही है, लेकिन वर्तमान में यहाँ की सियासी आग ने उसे भी पीछे छोड़ दिया है। नगर निगम चुनाव के नामांकन के साथ ही यह साफ हो गया है कि इस बार मेयर की कुर्सी का रास्ता कांटों भरा होगा। मैदान में दिग्गजों की ऐसी लंबी फेहरिस्त है कि मुकाबला बहुकोणीय हो चुका है और भाजपा-झामुमो जैसे दलों के समीकरण पूरी तरह उलझ गए हैं।
मैदान में दिग्गजों की अग्निपरीक्षा
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला उन चेहरों के बीच है जिन्होंने धनबाद की राजनीति को करीब से देखा है। एक तरफ प्रथम मेयर और रामधीर सिंह की पत्नी इंदु सिंह अपनी मजबूती के साथ मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह की दावेदारी ने मुकाबले को और भी रोमांचक बना दिया है। भाजपा ने जहां संजीव अग्रवाल को आधिकारिक समर्थन देकर अपना दांव खेला है, वहीं भाजपा छोड़ झामुमो का दामन थामने वाले पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल भी जंग लड़ रहे हैं।
समाजसेवियों और उद्यमियों की भी धमक
केवल राजनीतिक घराने ही नहीं, इस बार शहर के प्रतिष्ठित चेहरे भी बदलाव का झंडा लेकर उतरे हैं।केके कॉलेज के चेयरमैन रवि चौधरी, और उद्यमी रवि बुंदेला ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। डॉक्टर सुशील कुमार, मुकेश पांडेय, उद्यमी शांतनु चंद्रा, और प्रकाश महतो जैसे नाम भी मैदान में है। जो विकास और बदलाव के नाम पर वोट मांग रहे हैं। शमशेर आलम और रुस्तम अंसारी के आने से अल्पसंख्यक मतों के ध्रुवीकरण की संभावना बढ़ गई है।
भाजपा बनाम झामुमो प्रतिष्ठा की लड़ाई
भाजपा ने संजीव अग्रवाल को अपना उम्मीदवार घोषित कर अपने कैडर वोटों को बचाने की कोशिश की है, लेकिन चंद्रशेखर अग्रवाल के झामुमो में जाने से पार्टी को भीतरघात का डर सता रहा है। झामुमो की ओऱ से चंद्रशेखर अग्रवाल की मौजूदगी ने झामुमो के भीतर भी हलचल पैदा कर दी है।











