Jharkhand: एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं। रांची के धुर्वा इलाके से लापता हुए पांच साल के अंश और चार साल की अंशिका का कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस ने कई दावे, टीमें और जांच की, लेकिन ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है। हाई-सिक्योरिटी ज़ोन के करीब से दो बच्चों का गायब होना और पुलिस का इतने दिनों तक खाली रहना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
पुलिस के हाथ अब भी खाली
पुलिस ने 15 सदस्यीय विशेष टीम, डॉग स्क्वॉड, फॉरेंसिक जांच और सीसीटीवी फुटेज खंगालने का काम शुरू किया है। फिर भी, जमीन पर कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिला है जो बच्चों पर जानकारी दे सके। स्थानीय लोग कहते हैं कि इलाके में कई सीसीटीवी कैमरे खराब हैं या काम नहीं कर रहे हैं। यह जांच की दिशा को कमजोर बना रहा है।
बिस्किट लेने निकले थे बच्चे, फिर वापस नहीं लौटे
घटना शुक्रवार दोपहर करीब 2:30 बजे हुई। बच्चे पास की दुकान से बिस्किट लेने निकले थे। कुछ सौ मीटर की दूरी तय करके, बच्चे ऐसे गायब हुए कि एक हफ्ते बाद भी यह साफ नहीं हो पाया है कि वे किस दिशा में गए, किसने उन्हें देखा या वे कहां गए।
आखिर किसी के पास कोई जवाब क्यों नहीं ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि घनी आबादी वाले इलाके और भीड़-भाड़ के समय कोई कुछ क्यों नहीं देख सका? धुर्वा इलाका राज्य पुलिस मुख्यालय, मुख्यमंत्री सचिवालय, विधानसभा और हाईकोर्ट से कुछ ही किलोमीटर दूर है। ऐसे संवेदनशील इलाके से बच्चों का गायब होना और कई दिनों तक सुराग न मिलना सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।
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स्थानीय लोगो में नाराजगी
स्थानीय निवासी खुलकर कह रहे हैं कि अगर यह घटना किसी रसूखदार या अफसर के परिवार से जुड़ी होती, तो शायद जांच की गति और नतीजे कुछ और होते।
परिजनों का हाल बेहाल
सुनील कुमार और नीतू कुमारी की जिंदगी एक हफ्ते से रुक गई है। मां की आंखें रोते-रोते सूज चुकी हैं। घर में चूल्हा नहीं जल रहा और हर आहट पर लगता है कि शायद बच्चे लौट आए हों। दादा दुदेश राय कहते हैं, “हम हर दिन पुलिस से यही पूछते हैं—कुछ मिला क्या? जवाब वही रहता है… नहीं।”
जानकारी देने वालों को इनाम कि घोषणा
पुलिस ने जानकारी देने वाले को ₹51,000 का इनाम देने की घोषणा की है। लेकिन इतने दिनों बाद भी इनाम की घोषणा स्थानीय लोगों को जांच की कमजोरी पर पर्दा डालने जैसा लग रहा है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी जस का तस है—क्या इतने दिनों बाद भी पुलिस के हाथ खाली रहना सामान्य है? क्या दो मासूम इस तरह गायब हो सकते हैं, बिना कोई सुराग छोड़े? जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, धुर्वा की यह गुमशुदगी केवल एक केस नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की परीक्षा बनी हुई है।












