सोशल मीडिया की दुनिया में एक बार फिर प्राइवेसी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Elon Musk और Pavel Durov ने WhatsApp की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद टेक इंडस्ट्री में बहस तेज हो गई है।
दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब अमेरिका में WhatsApp के खिलाफ एक क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया गया। इसके बाद Musk और Durov दोनों ने खुलकर प्लेटफॉर्म की आलोचना की।
WhatsApp पर क्या हैं आरोप?
अमेरिका में दायर याचिका के मुताबिक, WhatsApp पर आरोप है कि वह अपने यूजर्स के निजी मैसेज को “इंटरसेप्ट” करता है और कथित तौर पर उन्हें थर्ड पार्टी कंपनियों के साथ साझा करता है।
इस केस में Meta Platforms और Accenture को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने ज्यूरी ट्रायल की मांग के साथ हर्जाने की अपील भी की है।
Musk और Durov का बड़ा हमला
Elon Musk ने अपने प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए WhatsApp पर भरोसा न करने की सलाह दी और यूजर्स से X Chat इस्तेमाल करने की अपील की।
WhatsApp’s “encryption” may be the biggest consumer fraud in history — deceiving billions of users. Despite its claims, it reads users’ messages and shares them with third parties. Telegram has never done this — and never will 🤝 pic.twitter.com/2DYguybgoU
— Pavel Durov (@durov) April 9, 2026
वहीं, Pavel Durov ने WhatsApp को लेकर और भी तीखा बयान देते हुए इसे “इतिहास का सबसे बड़ा एन्क्रिप्शन फ्रॉड” तक बता दिया।
Meta का जवाब: “आरोप पूरी तरह गलत”
इन आरोपों पर Meta ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। कंपनी के अनुसार, WhatsApp पिछले एक दशक से Signal Protocol का इस्तेमाल कर रहा है, जो दुनिया की सबसे सुरक्षित एन्क्रिप्शन तकनीकों में से एक मानी जाती है।
Meta का कहना है कि यूजर्स के मैसेज केवल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले तक ही सीमित रहते हैं और कंपनी खुद भी इन्हें नहीं पढ़ सकती।
पुराना है Musk vs Zuckerberg विवाद
Elon Musk और Mark Zuckerberg के बीच टकराव नया नहीं है।
- Musk द्वारा Twitter (अब X) खरीदने के बाद Meta ने Threads लॉन्च किया
- 2023 में Musk ने Zuckerberg को “केज फाइट” की चुनौती दी
- AI को लेकर भी दोनों के बीच कई बार जुबानी जंग हो चुकी है
यह नया विवाद उसी प्रतिस्पर्धा का एक और अध्याय माना जा रहा है।
क्या होता है End-to-End Encryption?
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी तकनीक है, जिसमें आपका मैसेज एक गुप्त कोड में बदल जाता है।
इसका मतलब:
- मैसेज सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही पढ़ सकता है
- बीच में कोई तीसरा व्यक्ति या कंपनी इसे एक्सेस नहीं कर सकती
- यहां तक कि प्लेटफॉर्म खुद भी कंटेंट नहीं देख सकता
WhatsApp की प्राइवेसी को लेकर उठे ये सवाल टेक इंडस्ट्री में भरोसे और डेटा सुरक्षा पर बड़ी बहस को जन्म दे रहे हैं। एक तरफ बड़े टेक लीडर्स आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर Meta उन्हें सिरे से खारिज कर रहा है।
अब सबकी नजर इस केस और इसके संभावित फैसले पर टिकी है, जो भविष्य में डिजिटल प्राइवेसी के मानकों को प्रभावित कर सकता है।
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