रांची: Ranchi नगर निगम चुनाव में मेयर पद की तस्वीर लगभग साफ होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है — रांची का अगला Deputy Mayor कौन होगा? राजधानी की सियासत में इस पद को लेकर गहमागहमी तेज है और पार्षदों के बीच जोड़-तोड़ का दौर भी शुरू हो चुका है।
नगर निगम की नई सरकार के गठन के साथ ही Deputy Mayor का चुनाव अब राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता जा रहा है। संख्या बल, सामाजिक संतुलन, महिला प्रतिनिधित्व और पार्टी रणनीति — सब मिलाकर समीकरण बेहद दिलचस्प हो गए हैं।
क्या कहता है संख्या बल?
Deputy Mayor का चुनाव पार्षदों के वोट से होता है। इस बार जिन पार्षदों की जीत हुई है, उनमें एक खेमे की बढ़त साफ मानी जा रही है। यदि सभी समर्थित पार्षद एकजुट रहते हैं, तो मुकाबला आसान हो सकता है।
लेकिन राजनीति में अंतिम क्षण तक कुछ भी तय नहीं माना जाता। क्रॉस वोटिंग या अंदरूनी नाराजगी जैसे फैक्टर भी भूमिका निभा सकते हैं।
सामाजिक और राजनीतिक संतुलन
- मेयर पद की स्थिति को देखते हुए डिप्टी मेयर चयन में संतुलन साधने की कोशिश हो सकती है।
- आदिवासी, पिछड़ा, सामान्य या अल्पसंख्यक वर्ग — सभी समीकरणों पर नजर रखी जा रही है।
- महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी चर्चा में है।
पार्टी नेतृत्व ऐसा चेहरा तलाशना चाहता है जो केवल अपने वार्ड तक सीमित न हो, बल्कि पूरे शहर में स्वीकार्य छवि रखता हो।
36,500 वोट रिजेक्ट: क्या बदली राजनीतिक चर्चा?
इसी चुनाव में मेयर पद के लिए 36,500 से अधिक मतपत्र रिजेक्ट होना भी बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्यों हुए इतने वोट अमान्य?
- कई मतदाताओं ने बैलेट पेपर पर एक से अधिक जगह मुहर लगा दी।
- कुछ ने मेयर और वार्ड के दोनों बैलेट का सही उपयोग नहीं किया।
- कुछ मतपत्रों पर अतिरिक्त निशान या अंगूठा लगा दिया गया।
- कई बैलेट क्षतिग्रस्त या गलत तरीके से भरे गए पाए गए।
- मेयर बैलेट पर NOTA का विकल्प नहीं था, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।
इतनी बड़ी संख्या में वोट निरस्त होना चुनावी जागरूकता पर सवाल खड़े करता है।
क्या पड़ सकता था असर?
विश्लेषकों का मानना है कि 36,500 वोट किसी भी शहरी चुनाव में बड़ा आंकड़ा होता है। यदि इन मतों का बड़ा हिस्सा वैध होता, तो मेयर पद की प्रतिस्पर्धा और कड़ी हो सकती थी।
हालांकि डिप्टी मेयर का चुनाव पार्षदों के माध्यम से होगा, लेकिन वोट रिजेक्शन की घटना ने राजनीतिक माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।
आगे क्या?
- पार्षदों की एकजुटता बनी रहती है या नहीं
- पार्टी किस सामाजिक समीकरण को प्राथमिकता देती है
- अनुभव बनाम नए चेहरे का संतुलन कैसे साधा जाता है
इन सभी सवालों का जवाब आने वाले दिनों में साफ होगा।
Ranchi की सियासत फिलहाल एक ही बिंदु पर केंद्रित है — डिप्टी मेयर की कुर्सी पर कौन बैठेगा?
समीकरण एक ओर इशारा जरूर कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला पार्षदों की रणनीति और पार्टी नेतृत्व की मुहर पर निर्भर करेगा।
राजधानी की राजनीति में अब हर नजर इसी फैसले पर टिकी है।













