Ranchi News: झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा के चालकों और तकनीकी कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था गहरे संकट में आ गई है. राजधानी रांची में हड़ताली कर्मचारी राजभवन के सामने अधनग्न होकर प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका आरोप है कि निजी एजेंसी उन्हें न्यूनतम सुविधाएं भी नहीं दे रही है और 12 घंटे से ज्यादा काम लेने के बावजूद न वेतन सही है, न ईपीएफ, न मेडिकल और न ही बीमा की सुविधा.
मरीजों को भारी परेशानी, निजी वाहनों पर बढ़ी निर्भरता
सरकारी एंबुलेंस सेवा बंद होने से मरीजों को मजबूरी में निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है. ये निजी वाहन संचालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं. ठाकुरगांव से आए एक मरीज के परिजन ने बताया कि उन्हें रांची सदर अस्पताल लाने के लिए 1500 रुपये तक देने पड़े.
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एक अन्य मामला में एक मरीज, जिसकी टांग टूटी हुई थी, अपनी ‘टुकटुक’ गाड़ी से अस्पताल पहुंचा, लेकिन इलाज के बाद उसकी गाड़ी अस्पताल परिसर से चोरी हो गई.
कर्मचारियों की मांगें
हड़ताल पर बैठे एंबुलेंस कर्मियों ने सरकार से स्पष्ट रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- उचित वेतन और स्थायी बहाली
- सभी कर्मचारियों को सरकारी सुविधाएं और अधिकार
- निजी संस्था की मनमानी पर रोक
- साप्ताहिक अवकाश और निर्धारित कार्य घंटे
कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे काम पर नहीं लौटेंगे.
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स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, खतरे में जानें
108 सेवा ठप होने से झारखंड के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर पड़ा है, जहां मरीज पहले से ही सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर हैं. अस्पतालों में आपातकालीन मामलों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था फिलहाल नहीं की गई है.
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम जनता ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और समाधान निकाले, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो सकें और मरीजों की जान खतरे में न पड़े.













