हरियाणा में दूषित पानी से मौतों का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। हरियाणा के पलवल जिले के हथीन उपमंडल स्थित छयांसा गांव में पिछले 15 दिनों के भीतर कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में पांच बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। प्राथमिक जांच में कुछ मामलों में हेपेटाइटिस-बी संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य मौतों के कारणों की विस्तृत जांच जारी है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में इंदौर में कथित तौर पर दूषित पानी से 16 लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब पलवल की घटना ने पीने के पानी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
400 से ज्यादा लोगों की जांच, 1500 की स्क्रीनिंग जारी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गांव में मेडिकल टीम तैनात कर दी गई है। अब तक 400 से अधिक ग्रामीणों की जांच की जा चुकी है, जबकि करीब 1500 लोगों की गहन स्क्रीनिंग की प्रक्रिया जारी है।
- लगभग 800 लोगों को ओपीडी में देखा गया
- सैकड़ों लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए
- 210 सैंपलों की जांच में 2 में हेपेटाइटिस-बी और 9 में हेपेटाइटिस-सी की पुष्टि
- गंभीर मरीजों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया
हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि मृतकों की वास्तविक संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है।
9 साल से 65 साल तक के लोग बने शिकार
रिपोर्ट के मुताबिक 27 जनवरी से 11 फरवरी के बीच सात लोगों की मौत हुई थी। इनमें से चार की मौत लिवर फेल होने से बताई गई। मृतकों की उम्र 9 साल से 65 साल के बीच थी।
ज्यादातर मरीजों में ये लक्षण सामने आए:
- तेज बुखार
- पेट दर्द
- दस्त
- सिरदर्द
- कमजोरी
विशेषज्ञों के अनुसार, हेपेटाइटिस-बी एक गंभीर यकृत संक्रमण है, जो एचबीवी वायरस के कारण होता है। यदि समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।
दूषित पेयजल पर शक, जांच रिपोर्ट का इंतजार
अधिकारियों ने खाद्य विषाक्तता और दूषित पेयजल की संभावना से इनकार नहीं किया है। गांव की कुल आबादी लगभग 5700 बताई जा रही है और मेडिकल टीम डोर-टू-डोर जांच कर रही है। पानी के सैंपल और रक्त नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
बड़ा सवाल: क्या पीने का पानी बन रहा है जानलेवा?
इंदौर के बाद पलवल में सामने आया यह मामला देशभर में पेयजल सुरक्षा पर चिंता बढ़ा रहा है। क्या ग्रामीण इलाकों में जल आपूर्ति की निगरानी में चूक हो रही है? क्या समय रहते जांच और रोकथाम के उपाय नहीं किए गए?
फिलहाल प्रशासन अलर्ट मोड पर है, लेकिन गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही मौतों की असली वजह साफ हो पाएगी।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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