Panchang 18 October 2026: शारदीय नवरात्रि के दौरान 18 अक्टूबर, रविवार को अष्टमी तिथि शुरू होगी। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा का विशेष महत्व है। हालांकि, अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर की सुबह तक रहने के कारण श्रद्धालुओं के बीच महाअष्टमी व्रत और कन्या पूजन की तारीख को लेकर असमंजस है।
रांची, झारखंड में स्थानीय पंचांग के अनुसार, 18 अक्टूबर को सुबह लगभग 8:29 बजे तक सप्तमी तिथि रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी, जो 19 अक्टूबर को सुबह 10:52 बजे तक रहेगी। ऐसे में श्रद्धालु अपनी परंपरा और उदया तिथि के अनुसार पूजा कर सकते हैं। आइए जानते हैं 18 अक्टूबर 2026 का पंचांग, रांची में सूर्योदय-सूर्यास्त का समय, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और महाअष्टमी पर कन्या पूजन की विधि।
18 अक्टूबर 2026 का पंचांग
- दिन: रविवार
- माह: आश्विन
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: सप्तमी सुबह लगभग 8:29 बजे तक, इसके बाद अष्टमी
- योग: सुकर्मा योग रात 11:56 बजे तक
- नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा दोपहर 12:49 बजे तक, इसके बाद उत्तराषाढ़ा
- पर्व: शारदीय नवरात्रि महाअष्टमी
- पूजनीय देवी: मां महागौरी
तिथि और नक्षत्र का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकता है।
रांची में 18 अक्टूबर 2026 का सूर्योदय और सूर्यास्त
रांची में 18 अक्टूबर को सूर्योदय लगभग सुबह 5:46 बजे और सूर्यास्त शाम 5:20 बजे होने का अनुमान है। धार्मिक कार्यों के लिए स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त का समय महत्वपूर्ण होता है, इसलिए पूजा से पहले रांची के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लें।
- सूर्योदय: सुबह लगभग 5:46 बजे
- सूर्यास्त: शाम लगभग 5:20 बजे
रांची में 18 अक्टूबर 2026 के शुभ मुहूर्त
रांची के लिए उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार, रविवार को प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह लगभग 4:07 बजे से 4:57 बजे तक
- प्रातः संध्या: सूर्योदय से पहले का समय
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह लगभग 11:10 बजे से 11:56 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: सूर्यास्त के आसपास का समय
- सायाह्न संध्या: सूर्यास्त के आसपास और उसके बाद का समय
ध्यान दें कि अभिजीत मुहूर्त सामान्य शुभ कार्यों के लिए माना जाता है। यदि अष्टमी तिथि के भीतर ही कन्या पूजन करना है, तो तिथि समाप्त होने के समय को प्राथमिकता दें।
रांची में 18 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय
हिंदू पंचांग में राहुकाल को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। रांची में 18 अक्टूबर 2026 को राहुकाल लगभग दोपहर 3:53 बजे से शाम 5:20 बजे तक रहने का अनुमान है।
धार्मिक अनुष्ठान की योजना बनाते समय स्थानीय पंचांग से राहुकाल के समय की पुष्टि करना उचित होगा।
महाअष्टमी और कन्या पूजन 18 या 19 अक्टूबर को कब करें?
इस बार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह लगभग 8:29 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10:52 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि आरंभ होगी। इस वजह से कुछ श्रद्धालु 18 अक्टूबर को अष्टमी तिथि के अनुसार कन्या पूजन करेंगे, जबकि उदया तिथि को मानने वाले श्रद्धालु 19 अक्टूबर को महाअष्टमी का मुख्य पूजन कर सकते हैं।
रांची में 19 अक्टूबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि रहने के कारण उदया तिथि के आधार पर महाअष्टमी का पूजन 19 अक्टूबर को करना उचित माना जा सकता है। हालांकि, व्रत, पूजन और पारण का निर्णय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार करें।
महत्वपूर्ण: 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि सुबह 10:52 बजे समाप्त होने के बाद नवमी शुरू होगी। इसलिए अष्टमी के अनुसार कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालु तिथि समाप्त होने से पहले पूजा का समय निर्धारित करें। नवमी के अनुसार पूजा करने वाले श्रद्धालु नवमी तिथि शुरू होने के बाद अनुष्ठान कर सकते हैं।
मां महागौरी की पूजा का महत्व
नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना से सुख-समृद्धि, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
भक्त इस दिन मां को सफेद फूल, मिठाई, फल और अन्य प्रसाद अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में मां महागौरी की पूजा को राहु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति की कामना से भी जोड़ा जाता है।
कन्या पूजन की विधि
नवरात्रि में कन्या पूजन को मां दुर्गा के बाल स्वरूप की आराधना माना जाता है। इस दिन कन्याओं को घर बुलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा और भोजन कराया जाता है।
- सबसे पहले घर और पूजा स्थल की सफाई करें।
- मां दुर्गा की पूजा कर कन्याओं को सम्मानपूर्वक घर बुलाएं।
- कन्याओं के पैर धोकर माथे पर तिलक लगाएं।
- उन्हें हलवा, पूरी और चने का प्रसाद खिलाएं।
- अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा, फल या उपहार भेंट करें।
- कन्याओं का आशीर्वाद लेकर उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करें।
कन्या पूजन के प्रसाद में हलवा, पूरी और काले चने विशेष रूप से प्रचलित हैं। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार नारियल, मखाना, मूंगफली, मिश्री और फल भी अर्पित कर सकते हैं।
कन्या पूजन के लिए कन्याएं न मिलें तो क्या करें?
यदि घर पर कन्या पूजन के लिए कन्याएं उपलब्ध नहीं हैं, तो श्रद्धालु मंदिर में मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं। मां को भोग लगाकर जरूरतमंदों में भोजन या प्रसाद वितरित करना भी एक विकल्प है। पूजा में श्रद्धा, स्वच्छता और सभी के प्रति सम्मान का ध्यान रखना चाहिए।
18 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि शुरू होगी और 19 अक्टूबर की सुबह 10:52 बजे तक रहेगी। रांची में स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय निर्धारित करते समय सूर्योदय, राहुकाल और तिथि का ध्यान रखें। उदया तिथि मानने वाले श्रद्धालु 19 अक्टूबर को महाअष्टमी का मुख्य पूजन कर सकते हैं। कन्या पूजन और व्रत पारण से पहले स्थानीय पंचांग या पुरोहित से समय की पुष्टि जरूर करें।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।








