Ranchi: झारखंड में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के इस्तेमाल को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में कई सरकारी और निजी बैंकों ने महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में CSR फंड के तहत योजनाएं संचालित करने का दावा तो किया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
जानकारी के अनुसार, झारखंड में HDFC बैंक ने वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 में कुल 148 गाँवों और 16 जिलों में योजनाएं संचालित करने की बात कही थी। इनमें प्राथमिक शिक्षा, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं के साथ महिला सशक्तिकरण के लिए कार्यक्रम शामिल थे। वहीं, DRDO और अन्य संस्थाओं द्वारा भी Drinking Water Cooler, RO Purifier और LED स्क्रीन जैसे उपकरण लगाने का दावा किया गया।
लेकिन सवाल यह है कि क्या ये सभी योजनाएं वास्तव में लागू की गईं? कई क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों का आरोप है कि CSR फंड का उपयोग केवल कागजों पर ही हुआ और उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला।
CSR फंड के दुरुपयोग पर सरकार सख्त
झारखंड सरकार ने भी इस मामले पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा है कि राज्य में CSR फंड के पारदर्शी उपयोग के लिए एक प्रभावी निगरानी प्रणाली बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि CSR योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्यों उठ रहे हैं सवाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि CSR फंड का बड़ा हिस्सा केवल शहरी क्षेत्रों में खर्च हो रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इसके अलावा, कई बैंकों द्वारा CSR के तहत लगाए गए उपकरण और सेवाएं भी जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रही हैं।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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