Jharkhand: नवंबर 2000 में झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद से, राज्य में कई हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के घोटाले हुए हैं। कई राजनेताओं, मंत्रियों और विधायकों पर गंभीर भ्रष्टाचार और धन शोधन के आरोप लगे हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें गिरफ्तार किया गया और जेल की सज़ा हुई।
इसमें कई आईएएस अधिकारियों की संलिप्तता भी उतनी ही चिंताजनक है, जो कभी झारखंड की नौकरशाही में शक्तिशाली और ज़िम्मेदार पदों पर रहे थे। पिछले कुछ वर्षों में, कई आईएएस अधिकारियों को धन की हेराफेरी, भूमि घोटाले और राज्य परियोजनाओं में अनियमितताओं से जुड़े मामलों में गिरफ्तार, निलंबित या जेल भेजा गया है।
यहाँ झारखंड के उन सभी आईएएस अधिकारियों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिन्होंने राज्य के गठन के बाद से कानूनी कार्रवाई का सामना किया है, साथ ही प्रत्येक मामले की पृष्ठभूमि, आरोप और परिणाम भी दिए गए हैं।
1. सजल चक्रवर्ती – चारा घोटाला (आरसी 20ए/96)
बैच: 1980
पदों पर रहे: पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) के उपायुक्त, परिवहन सचिव, झारखंड के मुख्य सचिव
गिरफ्तारी: नवंबर 2017
मामले का अवलोकन:
सजल चक्रवर्ती को झारखंड के इतिहास के सबसे कुख्यात भ्रष्टाचार घोटालों में से एक – चारा घोटाले में दोषी ठहराया गया था। 1990 के दशक में चाईबासा के उपायुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कथित तौर पर जाली बिलों का उपयोग करके कुल ₹39 करोड़ की धोखाधड़ीपूर्ण निकासी को मंजूरी दी थी। ये निकासी बिहार और बाद में झारखंड के कई जिलों को प्रभावित करने वाले गबन के एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा थीं।
न्यायिक परिणाम:
चक्रवर्ती को पाँच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई और ₹4 लाख का जुर्माना लगाया गया। वह आरसी 20ए/96 मामले में दोषी ठहराए गए 45वें अभियुक्त थे।
स्थिति:
अपनी सज़ा पूरी करने के बाद रिहा हुए। 2020 में उनका निधन हो गया।
2. पूजा सिंघल – मनरेगा घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग
बैच: 2000
पदों पर रहे: सचिव, खान विभाग; खूंटी के उपायुक्त
गिरफ्तारी: मई 2022
मामले का अवलोकन:
पूजा सिंघल खूंटी ज़िले में कथित तौर पर मनरेगा योजना के तहत आवंटित धन के दुरुपयोग के आरोप में जाँच के घेरे में आईं। जाँचकर्ताओं को बड़ी मात्रा में नकदी और उनके कार्यालय से जुड़े अनियमित वित्तीय लेनदेन के सबूत मिले।
न्यायिक परिणाम:
सिंघल को कई महीने हिरासत में रहने के बाद 2024 में झारखंड उच्च न्यायालय से ज़मानत मिल गई। उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है।
स्थिति:
ज़मानत पर बाहर; सेवा से निलंबित; जाँच जारी।
3. छवि रंजन – रांची सेना भूमि घोटाला
बैच: 2011
पदों पर रहे: रांची के उपायुक्त; समाज कल्याण निदेशक
गिरफ्तारी: मई 2023
मामले का अवलोकन:
छवि रंजन पर रांची में रक्षा विभाग की ज़मीन की अवैध बिक्री और हस्तांतरण में मदद करने, जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करने और ज़मीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी करने का आरोप लगाया गया था। कथित तौर पर, उन्होंने फर्जी म्यूटेशन और पंजीकरण स्वीकृतियाँ दीं जिससे निजी पक्षों को आर्थिक लाभ हुआ।
न्यायिक परिणाम:
झारखंड उच्च न्यायालय ने जाँच की प्रगति और तत्काल हिरासत की आवश्यकता न होने का हवाला देते हुए अगस्त 2024 में ज़मानत प्रदान की।
स्थिति:
ज़मानत पर बाहर; निलंबन के अधीन; मुकदमा जारी है।
4. विनय कुमार चौबे – शराब नीति में अनियमितताएँ
बैच: 2008
पद: आबकारी सचिव; पंचायत राज विभाग के प्रमुख सचिव
गिरफ्तारी: मई 2025
मामले का अवलोकन:
विनय चौबे शराब लाइसेंसिंग और वितरण अनुबंधों में अनियमितताओं में शामिल थे, उन पर चुनिंदा विक्रेताओं को लाभ पहुँचाने और उचित निविदा प्रक्रिया की अनदेखी करने का आरोप था। कथित हेराफेरी के परिणामस्वरूप राज्य को काफी वित्तीय नुकसान हुआ।
न्यायिक परिणाम:
चौबे को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जाँच अभी भी जारी है।
स्थिति:
हिरासत में; सेवा से निलंबित।
5. अमित प्रकाश – जेएसबीसीएल (पेय पदार्थ निगम) अनियमितताएँ
बैच: 2004
पद: प्रबंध निदेशक, झारखंड राज्य पेय पदार्थ निगम लिमिटेड (जेएसबीसीएल)
गिरफ्तारी: मई 2025
मामले का अवलोकन:
अमित प्रकाश पर जेएसबीसीएल में खरीद अनुबंधों और वित्तीय संवितरणों को मंजूरी देने के आरोप लगे, जिससे राज्य के खजाने को नुकसान हुआ। जाँचकर्ताओं ने अनुबंध देने में प्रक्रियागत उल्लंघन और पक्षपात की ओर इशारा किया।
न्यायिक परिणाम:
जांच जारी रहने तक प्रकाश को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
स्थिति:
हिरासत में; सेवा से निलंबित।
6. प्रदीप कुमार – भूमि आवंटन घोटाला
बैच:2005
पद: निदेशक, भूमि सुधार विभाग
गिरफ्तारी: 2019
मामले का अवलोकन:
प्रदीप कुमार पर नियमों का उल्लंघन करके भूमि पट्टों और म्यूटेशन को मंज़ूरी देन* और इन मंज़ूरियों के लिए निजी डेवलपर्स से कथित तौर पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था।
न्यायिक परिणाम:
उनकी जाँच जारी है, उन्हें निलंबित किया गया है और उन पर विभागीय कार्रवाई चल रही है।
स्थिति:
निलंबित; मामला सतर्कता अदालत में लंबित है।
7. राजीव अरुण एक्का – फ़ाइल हेरफेर के आरोप
बैच: 1994
पद:ld:मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव
जांच: 2023
मामले का अवलोकन:
राजीव अरुण एक्का एक वायरल वीडियो के बाद जांच के दायरे में आ गए, जिसमें उन्हें आधिकारिक प्रोटोकॉल के बाहर फाइलों पर हस्ताक्षर करते हुए दिखाया गया था। इसके बाद पद के दुरुपयोग और अनियमित स्वीकृतियों की सतर्कता जांच शुरू हुई।
स्थिति:
विभागीय जांच के अधीन; कोई हिरासत की सजा नहीं।
अन्य IAS जांच के दायरे में
कल्याण निधि, खनन पट्टों और भूमि आवंटन से जुड़ी अनियमितताओं के लिए कई अन्य अधिकारियों से पूछताछ की गई है या उन्हें निलंबित किया गया है। हालाँकि सभी को जेल नहीं हुई, लेकिन ये जाँचें झारखंड प्रशासन में लगातार भ्रष्टाचार की चुनौतियों का संकेत देती हैं।
झारखंड में आईएएस अधिकारियों की बार-बार गिरफ्तारी और जाँच शासन और प्रशासन में व्यवस्थागत समस्याओं को उजागर करती है। भूमि घोटालों से लेकर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग तक, ये मामले नौकरशाही की उस कुप्रथा को दर्शाते हैं जिसने राज्य को दो दशकों से भी अधिक समय से त्रस्त कर रखा है।कानूनी कार्यवाही जारी रहने के बावजूद, ये हाई-प्रोफाइल मामले एक चेतावनी के रूप में काम करते हैं और झारखंड प्रशासन में मज़बूत जवाबदेही, पारदर्शिता और निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं।












