Ranchi News: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से बाहर रखने के चुनाव आयोग के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग अब भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है और यह फैसला लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
असम में SIR से छूट
JMM नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि जब चुनाव आयोग ने बंगाल, केरल, पुडुचेरी, गोवा और राजस्थान जैसे राज्यों में SIR की घोषणा की, तो असम को इससे क्यों छूट दी गई , जबकि असम ही वह राज्य है जहां भाजपा और केंद्र सरकार घुसपैठियों के मुद्दे को सबसे अधिक उठाती रही है।
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“अब चुनाव आयोग वही करता है जो भाजपा को पसंद है”
सुप्रियो ने सवाल किया कि बिहार में SIR पूरा होने के बाद एक भी बांग्लादेशी चिन्हित नहीं हुआ, तो असम में प्रक्रिया से बचने की क्या वजह है? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा SIR को एक राजनीतिक औजार बनाकर धर्म विशेष के लोगों को मताधिकार से वंचित करना चाहती है। उन्होंने कहा, अब चुनाव आयोग वही करता है जो भाजपा को पसंद है, और जो भाजपा को पसंद नहीं, वो नहीं करता। यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
JMM की चेतावनी
JMM ने चेतावनी दी है कि यदि SIR के नाम पर नागरिकों की पहचान कर उन्हें वोट से वंचित किया गया, तो यह संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा। पार्टी ने आयोग से निष्पक्षता बनाए रखने और असम को लेकर अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
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