Jharkhand: झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र का अंतिम दिन गुरुवार को समाप्त हो गया, लेकिन बालू का मुद्दा एक बार फिर अधूरा ही रह गया। विपक्ष का कहना है कि जब तक राज्य में बालू की कालाबाजारी, मनमानी दरें और नीलामी में देरी पर ठोस जवाब नहीं मिलता, तब तक सत्र पूरा नहीं माना जा सकता।
पिछले कई सत्रों—बजट हो, मानसून हो या शीतकालीन—हर बार विपक्ष बालू को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा करता रहा है। इसी कड़ी में पनकी विधायक शशिभूषण मेहता ने सदन में बालू आपूर्ति और दरों से जुड़े सवाल उठाए। सवाल के जवाब में मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने दावा किया था कि जनता को 100 रुपये प्रति सीएफटी की दर से बालू उपलब्ध कराया जा रहा है।
विपक्षी दल ने मंत्री के दावे पर सवाल उठाए
सत्र के अंतिम दिन विरोधी दल के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कई बड़े खुलासे किए। उन्होंने कहा—
- “इस सरकार के 6 साल पूरे हो गए, लेकिन बालू का मुद्दा जस का तस है।”
- “सरकार और JSMVC की साठगांठ के कारण वर्षों से बालू घाटों की नीलामी समय पर नहीं हो पाई।”
- “अगर समय पर नीलामी होती तो राज्य को लगभग 6000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता।”
- “थाना से लेकर अंचल तक एक सिंडिकेट सक्रिय है, जिसके कारण ऊपर से नीचे तक लोग लाखों कमा रहे हैं।”
- “मंत्री ने 100 रुपये सीएफटी की दर बताई, लेकिन जब जनता से बात की गई तो पता चला कि कई जगहों पर 50 रुपये प्रति सीएफटी बालू मिल रहा है। यह सरकारी दावे और जमीन की हकीकत में बड़ा अंतर दिखाता है।”
374 बालू घाटों पर 100 रुपये प्रति ट्रैक्टर दर — मंत्री का दावा
विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि—
- राज्य के 374 बालू घाटों में पहले से ही 100 रुपये प्रति ट्रैक्टर की दर से बालू उपलब्ध कराया जा रहा है।
- बाकी बचे घाटों में भी इसी तरह की व्यवस्था जल्द लागू कर दी जाएगी।
- सरकार का दावा है कि इससे आम जनता को राहत मिलेगी और अवैध वसूली पर रोक लगेगी।
विपक्ष का प्रश्न — “अगर व्यवस्था है, तो कालाबाजारी क्यों जारी है?”
नवीन जायसवाल ने कहा कि सरकार कागज़ पर सस्ती दर बता रही है, लेकिन ज़मीन पर जनता को उसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग की कि—
- सभी बालू घाटों की पारदर्शी नीलामी
- सिंडिकेट पर कार्रवाई
- वास्तविक दरें सार्वजनिक करने
- और बालू परिवहन की लाइव मॉनिटरिंग
जैसी व्यवस्थाएँ तुरंत लागू की जाएं।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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