Jharkhand: झारखंड में इन दिनों ठंड का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। तापमान में गिरावट के साथ ही सर्द हवाओं ने लोगों को घरों में सिमटने पर मजबूर कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद मसीही समुदाय का उत्साह क्रिसमस की पुण्यरात पर देखते ही बन रहा था। बुधवार की आधी रात बालक यीशु के जन्मोत्सव को गहरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।
कड़ाके की ठंड में भी श्रद्धालु ऊनी कपड़ों में लिपटे, हाथों में मोमबत्तियां लिए चर्चों की ओर बढ़ते दिखे। जैसे ही रात के 12 बजे, चर्चों में घंटे-घड़ियाल की गूंज हुई, पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
आधी रात की विशेष आराधना में उमड़ा जनसैलाब
पुण्यरात की विशेष आराधना शुरू होते ही विश्वासियों ने उस पावन क्षण को स्मरण किया, जब परमेश्वर का पुत्र मानव रूप में धरती पर अवतरित हुआ। ठंड के बावजूद शहर के सभी प्रमुख चर्चों में देर रात से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

कई लोग परिवार और बच्चों के साथ घंटों पहले पहुंच गए थे ताकि इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन सकें। ठिठुरन भरी रात में भी आस्था की गर्माहट हर चेहरे पर नजर आ रही थी।
संत मरिया महागिरजाघर से जीईएल चर्च तक भव्य आयोजन
संत मरिया महागिरजाघर, संत पॉल्स कैथेड्रल, जीईएल चर्च समेत झारखंड के शहरों के सभी चर्चों को रोशनी, सितारों और क्रिसमस ट्री से भव्य रूप से सजाया गया था। गिरजाघर खचाखच भरे रहे। कई श्रद्धालु जगह न मिलने के कारण बाहर खड़े होकर ही प्रार्थना में शामिल हुए।

ठंडी हवा के बीच चर्चों के अंदर की रौनक और भक्ति का माहौल श्रद्धालुओं को सुकून दे रहा था।
धर्मगुरुओं का संदेश: ठंड में भी प्रेम की गर्माहट बांटें
धर्मगुरुओं ने अपने संदेश में कहा कि क्रिसमस केवल उत्सव नहीं बल्कि प्रेम, शांति और क्षमा का पर्व है। उन्होंने कहा कि जैसे ठंड में हम एक-दूसरे की गर्माहट से सहारा लेते हैं, वैसे ही समाज में भी प्रेम और भाईचारे से एक-दूसरे को संबल देना चाहिए।
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उन्होंने लोगों से अपील की कि गरीबों, जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों की इस ठंड में मदद करें और यीशु के बताए मार्ग पर चलें।
कैरोल गीत, केक कटिंग और बालक यीशु का स्वागत
आराधना के दौरान और उसके बाद चर्चों में कैरोल गीतों की मधुर धुन गूंजती रही। श्रद्धालुओं ने बालक यीशु की प्रतिमा के चरण चूमकर उनका स्वागत किया। जन्मोत्सव के प्रतीक रूप में केक काटा गया और सभी ने एक-दूसरे को बधाई देते हुए साझा किया।
बच्चों की खिलखिलाहट और बुजुर्गों के चेहरों पर संतोष, ठंडी रात में भी माहौल को गर्मजोशी से भर रहा था।
ठंड में भी आतिशबाजी और मांदर की थाप पर झूमे लोग
मिस्सा प्रार्थना के बाद चर्च परिसरों में आतिशबाजी की गई। ठंडी रात में आसमान रोशनी से जगमगा उठा। मांदर की थाप पर युवक-युवतियां और बच्चे खुशी से झूमते नजर आए। ठंड के बावजूद किसी के कदम नहीं रुके।

हर ओर “मेरी क्रिसमस” की शुभकामनाएं गूंजती रहीं।
25 दिसंबर को भी जारी रहेगा उत्सव
क्रिसमस का उल्लास सिर्फ आधी रात तक सीमित नहीं रहा। 25 दिसंबर को भी झारखंड के सभी चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ और उत्सव की रौनक बनी रहेगी।

झारखंड में ठंड के बीच शांति और प्रेम का संदेश
इस तरह झारखंड में बढ़ती ठंड के बीच भी क्रिसमस का पर्व शांति, प्रेम और भाईचारे के संदेश के साथ हर्षोल्लास में मनाया गया। यह पर्व साबित करता है कि जब दिलों में आस्था और प्रेम हो, तो ठंड भी उत्साह को नहीं रोक सकती।













