Christmas : क्रिसमस केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि खुशी, उदारता और आपसी प्रेम का वैश्विक उत्सव है। इस पर्व की सबसे लोकप्रिय और आकर्षक पहचान बन चुके हैं सांता क्लॉज-लाल पोशाक, सफेद दाढ़ी, मुस्कुराता चेहरा और उपहारों से भरी थैली। हर साल दिसंबर आते ही बच्चों से लेकर बड़ों तक को सांता का इंतजार रहता है। लेकिन सवाल यह है कि क्रिसमस में सांता का इतना महत्व क्यों है? सांता क्लॉज की परंपरा कहां से शुरू हुई और आज के समाज में उसका क्या अर्थ है?
सांता क्लोज का इतिहास: संत निकोलस से ‘सांता’ बनने का सफर
सांता क्लोज की कहानी किसी परीकथा जैसी लगती है, लेकिन इसका मूल वास्तविक इतिहास में छिपा है। सांता का वर्तमान स्वरूप चौथी शताब्दी के एक ईसाई पादरी संत निकोलस से प्रेरित है।
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उदारता के प्रतीक: संत निकोलस का जन्म तुर्की के मायरा (अब डेमरे) नामक स्थान पर हुआ था। वे बेहद अमीर परिवार से थे, लेकिन उनके मन में गरीबों के प्रति अगाध करुणा थी। उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति जरूरतमंदों को दान कर दी।
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मोजे में उपहार की कहानी: कहा जाता है कि एक गरीब व्यक्ति की तीन बेटियों के पास शादी के लिए पैसे नहीं थे। निकोलस ने रात के अंधेरे में चुपके से उनकी खिड़की से सोने के सिक्कों की थैली गिरा दी, जो सीधे सूखने के लिए टांगे गए मोजों में जाकर गिरी। यहीं से क्रिसमस पर मोजे (Stockings) लटकाने की परंपरा शुरू हुई।
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डच परंपरा: समय के साथ निकोलस की ख्याति बढ़ी और वे ‘सिंटरक्लास’ (Sinterklaas) के रूप में प्रसिद्ध हुए। डच प्रवासियों के माध्यम से यह नाम अमेरिका पहुँचा और धीरे-धीरे ‘सांता क्लोज’ बन गया।
Christmas में आधुनिक सांता और उसकी वैश्विक पहचान
आज हम जिस सांता को देखते हैं, उसे इस रूप में ढालने में कला और साहित्य का बड़ा हाथ है। 1823 में क्लेमेंट क्लार्क मूर की कविता “ए विजिट फ्रॉम सेंट निकोलस” ने सांता को एक रेंडियर वाली उड़ने वाली गाड़ी और चिमनी से उतरने वाले जादूगर के रूप में पेश किया। बाद में, 1930 के दशक में कोका-कोला के विज्ञापनों ने सांता को लाल और सफेद कपड़ों वाले आज के ‘ब्रांडेड’ लुक में घर-घर पहुँचा दिया।
सांता क्लोज का क्या है महत्व?
सांता क्लोज केवल बच्चों के मनोरंजन का साधन नहीं है; उसके अस्तित्व के पीछे गहरे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक अर्थ छिपे हैं:
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परोपकार और निःस्वार्थ सेवा: सांता हमें सिखाता है कि देने में जो सुख है, वह लेने में नहीं। वह बिना किसी बदले की उम्मीद के उपहार बाँटता है, जो मानवता के लिए एक बड़ा संदेश है।
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बच्चों की कल्पनाशीलता: बच्चों के लिए सांता आशा का प्रतीक है। यह उन्हें सिखाता है कि अगर वे ‘अच्छे बच्चे’ बनकर रहेंगे, तो उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। यह नैतिक मूल्यों को खेल-खेल में विकसित करने का एक तरीका है।
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खुशियों का विस्तार: सांता का आगमन खुशियों के आगमन का प्रतीक है। लाल रंग ऊर्जा और प्रेम को दर्शाता है, जो सर्दियों की ठंडी रातों में गर्माहट पैदा करता है।
Christmas में क्यों रहता है सांता क्लोज का इंतजार?
क्रिसमस की पूर्व संध्या पर बच्चों से लेकर बड़ों तक को सांता का इंतजार रहता है। इसके पीछे कई कारण हैं:
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रहस्य और रोमांच: सांता का रात के अंधेरे में आना और बिना दिखे उपहार छोड़ जाना एक रोमांच पैदा करता है। यह दुनिया के तार्किक नियमों से परे एक जादुई दुनिया का अहसास कराता है।
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इच्छाओं की पूर्ति: बच्चे सांता को पत्र लिखते हैं, जिसमें वे अपनी साल भर की छोटी-छोटी इच्छाएं व्यक्त करते हैं। यह पत्र लिखना वास्तव में अपनी भावनाओं और उम्मीदों को व्यक्त करने का एक जरिया है।
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पारिवारिक बंधन: सांता के बहाने माता-पिता अपने बच्चों के करीब आते हैं। वे सांता बनकर उपहार लाते हैं, जिससे परिवार के भीतर प्यार और जुड़ाव बढ़ता है।
सांता के माध्यम से ‘गिविंग’ का दर्शन
क्रिसमस और सांता क्लोज का मूल तत्व ‘गिविंग’ यानी दान है। आज की भागदौड़ भरी दुनिया में, जहाँ लोग अक्सर स्वार्थ में डूबे रहते हैं, सांता एक याद दिलाता है कि दुनिया में अभी भी अच्छाई जीवित है। वह हमें सिखाता है कि उपहार चाहे छोटा हो या बड़ा, उसे देने के पीछे की ‘भावना’ सबसे महत्वपूर्ण होती है।
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चाहे सांता क्लोज बर्फ के पहाड़ों से रेंडियर पर आता हो या हमारे माता-पिता के रूप में हमें प्यार देता हो, उसका महत्व कभी कम नहीं होता। वह हमारे भीतर छिपे उस मासूम बच्चे को जीवित रखता है जो चमत्कार पर विश्वास करता है। इस क्रिसमस, जब आप किसी को सांता के रूप में देखें, तो याद रखें कि सांता कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि दया, प्रेम और खुशी बाँटने की एक चिरंतन परंपरा है।












