Jharkhand News: राजधानी में कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय परिसर में जब ढोल-नगाड़ों की थाप गूंजी और पारंपरिक गीतों के स्वर उभरे, तो नजारा किसी उत्सव जैसा था। यह उत्सव था ‘पेसा कानून’ (पंचायत उपबंध, अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार अधिनियम) को मिली कैबिनेट की मंजूरी का। केंद्रीय सरना समिति और राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर इस ऐतिहासिक फैसले के लिए अपना आभार जताया।
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Jharkhand News: पूर्वजों के संघर्ष को समर्पित एक जीत
मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड की जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने लंबी और कठिन लड़ाइयां लड़ी हैं। “पूर्वजों के संघर्ष से मिला यह झारखंड आज अपने असली हक की ओर बढ़ रहा है,” मुख्यमंत्री के इन शब्दों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति के भीतर अपनी संस्कृति के प्रति गौरव भर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे राज्य गठन के बाद भी यहाँ के मूलवासियों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया गया, लेकिन अब वक्त सुधार का है।
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गांव की मजबूती, राज्य की प्रगति
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘गांव की सरकार’ है। पेसा कानून लागू होने से अब ग्राम सभाओं के पास अपने क्षेत्र के विकास, संसाधनों के प्रबंधन और सामाजिक विवादों को सुलझाने की वास्तविक शक्ति होगी। उन्होंने युवाओं और ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे इस कानून की बारीकियों को समझें। उन्होंने सचेत किया कि कुछ तत्व ग्रामीणों को गुमराह करने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए शिक्षा और जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार है।
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Jharkhand News: सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण
सीएम ने जनजातीय स्वशासन को राज्य की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि जब गांव का अंतिम व्यक्ति सशक्त होगा और अपनी परंपराओं के साथ स्वाभिमान से जिएगा, तभी झारखंड सही मायने में विकसित कहलाएगा। नियुक्तियों के दौर और रोजगार के नए अवसरों का जिक्र करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह ‘युवा झारखंड’ अब रुकने वाला नहीं है।
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प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को माला पहनाकर और पारंपरिक तरीके से सम्मानित किया। इस मौके पर सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की और राजी पड़हा के महासचिव जलेश्वर उरांव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिनकी आंखों में अपनी जमीन और अधिकार मिलने की खुशी साफ झलक रही थी।












