झारखंड ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन'(SIR): झारखंड में एसआइआर को लेकर चुनाव आयोग की तैयारी अंतिम चरण में है। एसआइआर की शुरूआत की औपचारिक घोषणा भी इस महीने कर दी जाएगी। राज्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को चुनाव आयोग ने एसआइआर की अधिसुचना जारी होने के बाद करीब 100 दिनों में पूरी प्रक्रिया को खत्म करने का लक्ष्य दिया है। झारखंड के सभी जिलों में एसआइआर को लेकर दिशानिर्देश देने की प्रक्रिया भी जारी है।
झारखंड में एसआइआर पिछली बार वर्ष 2003 में हुआ था। इसका उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष और गहन निरीक्षण होता है जिसमें मतदाता सूची में दर्ज सभी नामों का जांच किया जाता है, यह मृत, फर्जी या दो जगह पर दर्ज मतदाताओं के नाम को हटाने और इसके पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए होता है। एसआइआर के दौरान बूथ लेवल के ऑफिसर घर-घर जा कर मतदाताओं के नाम, पता, फोटो की जांच करेंगे। एसआइआर के दौरान मतदाता सुची का मिलान वर्ष 2003 के मतदाता सुची से किया जाएगा। इसके लिए सभी मतदाताओं को निर्धारित रूप से फॉर्म भरना होगा।
झारखंड ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन'(SIR): कुल मतदाताओं की संख्या
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 2.65 करोड़ पहुंच गई है। निर्वाचन आयोग अब इस डेटाबेस को पूरी तरह बेदाग बनाने के मिशन पर है, ताकि आने वाले चुनावों के लिए एक पारदर्शी सूची तैयार की जा सके। राज्य में मतदाता सूची के सत्यापन का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। अब तक राज्य के कुल मतदाताओं में से 73% से अधिक का भौतिक और डिजिटल सत्यापन किया जा चुका है। निर्वाचन विभाग का लक्ष्य जल्द से जल्द शत-प्रतिशत मतदाताओं के रिकॉर्ड को अपडेट करना है।
12 लाख संदिग्ध नाम रडार पर
प्रारंभिक जांच में एक बड़ा खुलासा भी हुआ है, राज्य भर में लगभग 12 लाख ऐसे मतदाता हैं जो या तो उस पते पर मौजूद नहीं हैं, कहीं और पलायन कर चुके हैं, या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा कई ‘दोहरी प्रविष्टि’ वाले नाम भी मिले हैं। मतदाता सूची में केवल नाम हटाना ही नहीं, बल्कि मौजूदा डेटा को सही करना भी प्राथमिकता है। जिलों में की गई जांच के दौरान फोटो, नाम की स्पेलिंग और पते से जुड़ी करीब 6.72 लाख गलतियां मिली हैं। इन गलतियों को सुधारने के लिए डेटा एंट्री और डिजिटल अपडेट का काम तेज कर दिया गया है।
एसआइआर की प्रक्रिया शुरू होते ही मतदाता सूची की व्यापक जांच शुरू हो जाएगी। इसके लिए राज्य के सभी जिलों के निर्वाचन पदाधिकारियों (DEO), ईआरओ (ERO) और एईआरओ (AERO) के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कर रणनीति बनाई जा रही है। इसके साथ ही मतदाताओं की पैरेंटल मैपिंग और डिजिटल डेटा को पुराने रिकॉर्ड्स के साथ सिंक करने का काम भी तेजी से किया जा रहा है ताकि एक ही परिवार के वोटर्स का रिकॉर्ड एक ही जगह पर रहे।
मतदाताओं के लिए जरूरी प्रक्रिया?
अगर आपके वोटर आईडी में नाम की स्पेलिंग गलत है या फोटो साफ नहीं है, तो यह SIR प्रक्रिया उसे सुधारने का सबसे सटीक मौका है। मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने पहचान संबंधी दस्तावेजों के साथ तैयार रहें ताकि BLO के दौरे के समय सुधार की प्रक्रिया तुरंत पूरी की जा सके।












