Ranchi : देश के लाखों युवाओं के लिए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना एक सपने के जैसा होता है। युवा कठिन परिश्रम करके UPSC जैसे सबसे कठिन परीक्षा को पास कर देश की सेवा करना चाहते हैं। झारखंड जैसे पिछड़े राज्य के कई छात्रों ने भी यूपीएससी में अपना जलवा बिखेरा है।
हालांकि कुछ वर्षों के आंकड़ो पर गौर करे तो इसमें झारखंड का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। राज्य के होनहार युवा अब इस सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में पिछड़ते जा रहे हैं। पहले छात्र संसाधन कम होने के बावजूद परीक्षा पास कर देशभर के कोने-कोने में झारखंड का परचम लहराया है पर अब कई परिवार पढ़ाई में लाखों रुपए खर्च करके भी अपने बेटे-बेटियों को परीक्षा पास नहीं करा पा रहे हैं। आखिर इस गिरते ग्राफ का कारण क्या है।
यूपीएससी परीक्षा 2025 में सिर्फ 2 छात्रों ने पास की परीक्षा
अगर यूपीएससी की बात करें, तो 2024 और 2025 में लगभग 13.4 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। इनमें से अंतिम चरण में केवल 958 से 1000 तक ही अभ्यर्थियों का चयन हो पाया।
रुझानों के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षा में 13 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं। लेकिन मुख्य परीक्षा में लगभग 14,600 अभ्यर्थी ही पहुंचते हैं। इसके बाद साक्षात्कार (इंटरव्यू) में करीब 2900 से 3000 उम्मीदवार शामिल होते हैं।
अगर झारखंड के परिणाम देखें, तो गिरावट साफ नजर आती है:
2021 – 29 अभ्यर्थी सफल
2022 – 30+ अभ्यर्थी सफल
2023 – 30+ अभ्यर्थी सफल
2024 – 10+ अभ्यर्थी सफल
2025 – केवल 2 अभ्यर्थी सफल
अब हमने रांची के कुछ प्रमुख कोचिंग संस्थानों में जाकर यह जानने की कोशिश की कि यूपीएससी की तैयारी में कितना खर्च आता है और वहां से हर साल कितने छात्र सफल होते हैं।
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कोचिंग संस्थानों के अनुसार, पूरे भारत में उनके यहां से करीब 100 छात्र हर साल सफल होते हैं।
लेकिन झारखंड से केवल 8 से 10 छात्र ही परीक्षा के अंतिम चरण तक पहुंच पाते हैं, जिनमें से बहुत कम छात्र चयनित हो पाते हैं।
यूपीएससी में लगातार गिरता जा रहा सफल छात्रों का ग्राफ
कुछ कोचिंग संस्थानों ने बताया कि पहले हर साल 4 से 5 छात्र यूपीएससी परीक्षा निकाल लेते थे,
लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सफलता दर लगातार घट रही है। इसका मुख्य कारण बढ़ता हुआ कम्पटीशन और कम होती भर्तियां हैं। अब अगर हम वैकेंसी के आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति और साफ हो जाती है:
वर्ष -इंटरव्यू – अंतिम चयन
2025 -979 -958
2024 -1056 -1009
2023 -1105- 1016
2022- 1011- 933
2021- 748- 685
2020- 836- 761
2019- 896- 829
2018- 782- 759
2017- 980- 9 90
2016- 1079- 1099
2015- 1129- 1078
इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि 2024 से 2025 के बीच भर्तियों में कमी आई है। कई बार वैकेंसी की सभी सीटें भी पूरी तरह भर नहीं पाती हैं।
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अब अगर झारखंड के अभ्यर्थियों के आंकड़ों को देखें:
- वर्ष सफल अभ्यर्थी
- 2025 11
- 2024 10
- 2023 30+
- 2022 30+
- 2021 29
यहां साफ दिखता है कि पिछले कुछ वर्षों में झारखंड के छात्रों का प्रदर्शन गिरा है।
समझने वाली बात यह है कि यह गिरावट क्यों हो रही है, जबकि कोचिंग संस्थान अच्छी-खासी फीस लेते हैं।
लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी झारखंड के छात्र पीछे
आज के समय में किसी भी टॉप कोचिंग संस्थान में यूपीएससी की तैयारी के लिए अभिभावकों को कम से कम ₹50,000 से ₹1,50,000 तक खर्च करना पड़ता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पहले, जब संसाधनों की कमी थी, तब झारखंड के छात्र बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे। उस समय ज्यादातर छात्र जैक बोर्ड से पढ़ाई करते थे।
लेकिन अब, जब बेहतर कोचिंग और सुविधाएं उपलब्ध हैं, तब भी झारखंड के छात्र आईएएस नहीं बन पा रहे हैं।
यह स्थिति कई बड़े सवाल खड़े करती है—-
क्या शिक्षा का स्तर गिर रहा है?
क्या सही मार्गदर्शन की कमी है?
या फिर तैयारी का तरीका ही बदल गया है?








