झारखंड में शराब घोटाले को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को मिली डिफॉल्ट बेल को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मरांडी ने कहा कि राज्य में सरकार प्रशासन चला रही है या “सर्कस”, यह समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि Anti Corruption Bureau (ACB) अब तक विनय चौबे के खिलाफ समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई, जिसके कारण उन्हें डिफॉल्ट बेल मिल गई।
उन्होंने कहा कि ACB ने चौबे और उनके परिवार की संपत्तियों की जांच की, जिसमें कथित तौर पर आय से अधिक और बेनामी संपत्ति के कई तथ्य सामने आए। इसके बावजूद जांच एजेंसी कार्रवाई को अंजाम तक नहीं पहुंचा सकी।
मरांडी ने यह भी दावा किया कि शराब घोटाले में चौबे की भूमिका पहले से ही विभिन्न खबरों और गवाहियों के माध्यम से सार्वजनिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कई आईएएस अधिकारियों ने भी कोर्ट में उनके खिलाफ गवाही दी, लेकिन फिर भी चार्जशीट दाखिल नहीं होना गंभीर सवाल खड़ा करता है।
नेता प्रतिपक्ष ने ACB पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि एजेंसी का इस्तेमाल विरोधियों को परेशान करने, दबाव बनाने और राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे मामलों में ACB की कार्यप्रणाली पर संज्ञान लिया है।
मरांडी ने यह भी कहा कि विनय चौबे की गिरफ्तारी के समय ही उन्होंने आशंका जताई थी कि यह कार्रवाई “बड़ी मछलियों को बचाने” के लिए की जा रही है। पिछले 10-11 महीनों से जांच के नाम पर केवल दिखावा किया गया।
अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता का दुरुपयोग कर जांच को कुछ समय तक प्रभावित किया जा सकता है, लेकिन अंततः सबका हिसाब होगा।













